जाने पैगंबर मुहम्मद s as साहब के बारे मे गुरु नानक जी के सुनहरे विचार

एडमिन

नबी मुहम्मद #ﷺ की अ़ज़मत और महानता का बयान हर इंसाफ पसंद शख्सियत ने किया है।
उन्हीं में से एक नाम गुरु नानक जी का भी है।
आईये इस पोस्ट में हम गुरु नानक जी के उन सुनहरे विचारो को देखते है जो आपने नबी ﷺ की शान और अज़मत में बयांन किये।
गुरु नानक जी कहते हैंकि
सलाह़त मोहम्मदी मुख ही आखू नत! ख़ासा बंदा सजया सर मित्रां हूं मत!
(यानीः-) ह़ज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलेही व सल्लम की तारीफ़ हमेशा करते चले जाओ।
आप अल्लाह तआला के ख़ास बंदे और तमाम नबियों और रसूलों के सरदार हैं।
(जन्म साखी विलायत वाली, पेज नम्बर 246, जन्म साखी श्री गुरु नानक देव जी, प्रकाशन गुरु नानक यूनीवर्सिटी, अमृतसर, पेज नम्बर 61)
नानक जी ने इस बारे में ये बात भी साफ़-साफ़ बयान किया है कि दुनिया की निजात (मुक्ति) और कामयाबी अल्लाह तआला ने हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलेही व सल्लम के झण्ड़े तले पनाह लेने से वाबस्ता कर दिया है।
गोया कि वही लोग निजात पाऐंगे, जो हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलेही व सल्लम की फ़रमाबरदारी इख़्तियार करेंगे और लहज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलेही व सल्लम की ग़ुलामी में ज़िन्दगी बसर करने का वादा करेंगे। नानक जी कहते हैं कि…
सेई छूटे नानका हज़रत जहां पनाह!
(यानीः-) निजात उन लोगों के लिए ही मुक़र्रर है, जो हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलेही व सल्लम की पनाह में आऐंगे और उनकी ग़ुलामी में ज़िन्दगी बसर करेंगे।
(जन्म साखी विलायत वाली, प्रकाशन 1884 ईस्वी, पेज 250)
नानक जी के इस बयान के पेशे नज़र गुरु अर्जून जी ने यह कहा है कि
अठे पहर भोंदा, फिरे खावन, संदड़े सूल! दोज़ख़ पौंदा, क्यों रहे, जां चित न हूए रसूल!
यानी:-जिन लोगों के दिलों में हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलेही व सल्लम की अ़क़ीदत और मोहब्बत ना होगी, वह इस दुनिया मे आठों पहर भटकते फिरेंगे और मरने के बाद उन को दोज़ख़ मिलेगी।
गुरु ग्रन्थ साहब, पेज नम्बर 320
नानक जी ने इन बातों के पेशे नज़र ही दूसरे लोगों को ये नसीहत की है कि
मोहम्मद मन तूं, मन किताबां चार! मन ख़ुदा-ए-रसूल नूं, सच्चा ई दरबार!
यानी:- हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलेही व सल्लम पर ईमान लाओ और चारों आसमानी किताबों को मानो।
अल्लाह और उस के रसूल पर ईमान लाकर ही इन्सान अपने अल्लाह के दरबार में कामयाब होगा।
(जन्म साखी भाई बाला, पेज नम्बर 141)
एक और जगह पर नानक जी ने कहा कि
ले पैग़म्बरी आया, इस दुनिया माहे! नाऊं मोहम्मद मुस्तफ़ा, हो आबे परवा हे!
यानीः-जिन का नाम मुहम्मद सल्लल्लाहु अलेही व सल्लम है,
वह इस दुनिया में पैग़म्बर बन कर तशरीफ़ लाए हैं और उन्हें किसी भी शैतानी ताक़त का ड़र या ख़ौफ़ नहीं है।
(जन्म साखी विलायत वाली, पेज नम्बर 168)
एक और मक़ाम पर गुरु नानक जी ने कहाँ है कि..
हुज्जत राह शैतान दा, कीता जिनहां कुबूल! सो दरगाह ढोई, ना लहन भरे, ना शफ़ाअ़त रसूल!
यानी:-जिन लोगों ने शैतानी रास्ता अपना रखा है और हुज्जत बाज़ी से काम लेते हैं। उन्हें अल्लाह के दरबार में रसाई हासिल ना हो सकेगी।
ऐसे लोग हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलेही व सल्लम की शफ़ाअ़त से भी महरुम रहेंगे।
शफ़ाअ़त उन लोगों के लिए है, जो शैतानी रास्ते छोड़कर नेक नियत से ज़िन्दगी बसर करेंगे।
(जन्म साखी भाई वाला, पेज नम्बर 195)

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