अपनी 25 साल की राजनीती में मुल्ला मुलायम ने मुसलमानों को तोहफे में क्या दिया?

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रिपोर्टर.

1992 से मुसलमानों के मसीहा के रूप में,खूद को बतलाने और जतलाने वाले मुल्ला मुलायम द्वारा पिछले 25 सालों में मुसलमानों को दिये गये ज़ख्म के बारे में अगर विस्तार से देखें तो रोंगटें खड़े हो जायेंगें,

कारसेवकों पर गोली चलवाकर खुद को मुसलमानों का हमदर्द  व मसीहा साबित करने वाले मुलायम सिंह के दौर में माफिया गीरी और गुंडागरदी हमेशा से चरम पर होती आयी है जिसका शिकार दलितों और मुसलमानों को होना पड़ता है,वैसे तो मुलायम सिंह का दो रुखा चेहरा 2012 में पूर्ण बहूमत से सरकार बनाने के बाद ही सामने आया है.मुसलमानों के सहारे राज गद्दी हासिल करने वाले मुलायम को बी.जे.पी ने 

*राष्ट्रीय राजनीति में भागीदारी का ख़्वाब दिखा कर उन्हें हिंदुत्व को बढ़ावा देने के लिए तैयार कर लिया।

      वर्ष 2012 में मुसलमानों के एक तरफ़ा वोटिंग से सत्ता की कुर्सी तक पहुँचने वाले मुल्ला मुलायम मुसलमानो को भूल बैठे और अपना सेक्युलर ज़मीर नागपुर में गिरवी रख कर यू०पी० में संघियों को खुली छूट दे दी।

      धिरे  धीरे उत्तर प्रदेश फसाद प्रदेश बन गया,

कोसी कलां, मुरादाबाद, बरेली और फिर सब से भयानक, मुजफ़्फरनगर फसाद जैसे  करीब 600 फसाद करवा कर संघियों ने मुसलमानों को घुटने पर ला दिया।ल्प

     वैसे दंगों का जिक्र होते ही अमूमन 1984 का सिख दंगा, 2002 का गोधरा या फिर  मुजफ्फरनगर की बड़ी घटनाएं ही जेहन में कौंध उठतीं हैं। यानी कुछ ही बड़े दंगे हर किसी को याद  हैं।

   मगर आपको जानकर हैरानी ही नहीं चिंता भी होगी कि देश में अब तक हजार दो हजार बार नहीं बल्कि पूरे 25 हजार बार दंगे हो चुके हैं। जीनकी भेंट साढ़े दस हजार से अधिक हंसती-खेलती जिंदगियां चढ़ चुकी हैं।

   वहीं  30 हजार से अधिक लोग मारपीट में अपाहिज होकर आज भी तिल-तिल कर मरने को मजबूर हैं। लगभग हर राज्य उन्मादी भीड़ के खूनी खेल का गवाह बन चुका है।

     देश में पिछले दो दशक मे हुए दंगों की संख्या और मरने तथा घायलों के बारे में खुलासा हुआ है यूपी के गाजीपुर निवासी शम्स तबरेज हाशमी की आरटीआई से। 

  उन्होंने गृहमंत्रालय से दंगों व पीड़ितों के बारे में सवालात किये थे,

*आरटीआई आवेदनकर्ता हाशमी को गृहमंत्रालय की उपसचिव रीना गुहा ने सभी राज्यों में हुए दंगों, मरने व घायलों की जानकारी आदि बिंदुओं पर पूछे गए सवालों का जवाब दिया है।

   रिपोर्ट का मजमून निकालें तो वर्ष 1990 से लेकर 2015 के बीच देश में अब तक 25337 दंगे हुए। जिसमे कुल 10452 लोगों की हत्या हुई तो 30515 लोगों को घायल होना पड़ा। यह तो सरकारी आंकडे़ रहे और हताहत लोगों की संख्या और ज्यादा होने की आशंका है।

     आरटीआई में यह भी बताया गया है कि उत्तर प्रदेश के इस सपा राज में सर्वाधिक 637 दंगे हुए हैं,।

  सपा के राज में 2012 से 2015 तक सर्वाधिक 637 दंगे हुए। जिसमें 162 लोगों की हत्या और डेढ़ हजार से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए।

    यूपी में 2013  सबसे डरावना साल रहा,

उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए वर्ष 2013 सबसे ज्यादा डरावना रहा। इस साल सपा सरकार की नाकामी से उसके नाम 247 दंगों का अनचाहा रिकार्ड चढ़ गया।

    कानून-व्यवस्था की नाकामी से सिर्फ एक साल में ही यूपी को छोटे-बड़े कुल 247 दंगे झेलने पड़े।

और जाहिर सी बात है कि  इन सब में मुलायम सिंह और अखिलेश सरकार पूरी तरह से जिम्मेदार है,जो कंधे से कंधा मिला कर 

उन्मादियों  और फ़सादियों के साथ रही, 

     लॉ एंड आर्डर का जनाज़ा निकाल दिया गया,

यू०पी० में गुजरात दुहराया गया, और अब फिर जगह जगह मुज़फ़्फ़रनगर दोहराने की धमकियाँ बी०जे०पी० के नेता दे रहे हैं।

  , हद तो तब हुई कि अदालत की  कमीशन द्वारा अखिलेश सरकार ने मुज़फ़्फ़रनगर फसाद  से जुङे  नेताओं को क्लीन चिट दिला दिया, मुआवज़े के नाम पर ख़ूब मारामारी हुई बेगुनाहों की जायेदादें लूट ली गयीं, 

    शासन  व प्रशासन खमोश तमाशायी बनी रही, 

मुलायम पर “संघ” का ज्वर इस स्तर पर चढ़ गया है कि वह कहते हैं कार सेवकों पर गोली चलवाने पर आज तक उन्हें पश्चाताप है।

     आरक्षण का झूठा वादा करके वोट लेने के बाद से आज तक मुलायम पुनः इस पर बोले ही नहीं, 

इसी पर बस नहीं उर्दू की हैसियत से खिलवाड़ किया जाने लगा, ।

    आर०टी०आई० अब उर्दू में नहीं  मिलेगी,  बिजली संकट  से पूरा प्रदेश झूझ रहा है*

नरेगा, मनरेगा, लोहिया और इसी प्रकार के सैंकड़ों प्रोजेक्ट सरकारी कार्यकर्ताओं के भ्रष्टाचार का शिकार  हो रही है, लैपटॉप बाँट कर तरक़्क़ी की राजनीति करने वाले अखिलेश को पता भी नहीं कि उनके बाप ने समाजवादी पार्टी को बी०जे०पी० के हाथों बेंच दिया है?

  यहीं नहीं,रिश्वत खोरी,भर्ष्ट्राचार,घोटालों,और इन सब से बढ़ कर हत्या,व रेप की बढ़ती घटनाओं ने उत्तरप्रदेश से ला एण्ड आर्डर को खत्म ही कर दिया  है।.

   अब अगर अपराधिक आंकड़ों की बात करें तो 

कैग रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में वर्ष 2013-14 में  महिलाओं के खिलाफ अपराधों में बहुत तेजी से बढोत्तरी हुई।, वर्ष 2012-13 में जहां यह संख्या 24552 थी वह 2013-14 में 31810 हो गई और वर्ष 2014-15 में भी इसमें कोई कमी नहीं हुई।

   कैग ने कहा कि देश में होने वाली कुल आपराधिक घटनाओ में 12.7 प्रतिशत के साथ उत्तर प्रदेश सबसे उपर है और यहां महिलाओके विरूद्व अपराध की घटनाएं सर्वाधिक हैं।

और इसकी वजह पुलिसकर्मियों की कमी भी बताई गयी है।

    पुलिसकर्मियों की संख्या में 55 प्रतिशत की कमी है और यदि इसे दूर नहीं किया गया तो स्थिति और भी बिगड सकती है।

     रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि केन्द्रीय गृह मंत्रालय द्वारा पुलिस बल में महिलाओ की संख्या 33 प्रतिशत किए जाने की सलाह के विपरीत उत्तर प्रदेश में महिला पुलिसकर्मियों की संख्या मात्र 4.55 प्रतिशत ही है।  

  इसलिए नाबालिग लड़कियों एवं महिलाओ के विरूद्व होने वाले अपराधों की बढती संख्या को देखते हुए महिला पुलिसकर्मियों की संख्या में पर्याप्त बढोत्तरी की जानी चाहिए। 

  अपनी रिपोर्ट में कैग ने जो आंकडा दिया है, उसके मुताबिक वर्ष 2012-13 में बलात्कार का शिकार होने वाली नाबालिग लड़कियों की संख्या 1033 थी वह 2014-15 में 1619 पर पहुंच गई।

   इसी दौरान नाबालिग लड़कियों की अस्मत लूटने की कोशिश की घटनाएं 2280 से बढ़कर वर्ष 2014-15 में 4297 तक पहुंच गई। 

  इससे पूर्व प्रश्नकाल के दौरान सरकार ने भाजपा विधान दल के नेता सतीश महाना के प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि मार्च 2016 से 18 अगस्त 2016 तक प्रदेश में बलात्कार की 1012, महिलाओ के उत्पीड़न की 4520 , लूट की, 1386 तथा डकैती की 86 घटनाएं हुई है।

   ऐसे  हालात में यही कहा जा सकता है कि एक तरफ

अखिलेश विकास के रथ पर चढ़ना चाहते हैं,पर उनके ऊंची रेस वाले पिता मुलायम सिंह केंद्र के सिंहासन का सफर करना चाहते हैं चाहे वो आहों पर हो या लाशों पर। 

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