इस्लाम में औरत को वैसे ही जीनत इख्तियार करने का हुक्म दिया है जैसे उसके शौहर को पसंद है,पढ़िए पूरा दिलचस्प खुलासा

एमडी डिजिटल न्यूज चैनल और प्रिंट मीडिया
ब्यूरो चीफ
मो अफजल इलाहाबाद

इस्लाम ने औरत के जेब-ओ-ज़ीनत के लिए कोई ख़ास अहकामात मुतय्यन नहीं फरमाए बस औरत को वैसे ही ज़ीनत इख़्तियार करने का हुक्म दिया है जैसे उसके शौहर को पसंद है, वो घर में कैसा ही लिबास पहने क्योंकि औरत और मर्द दोनों एक दूसरे के लिबास हैं (अल निसा) औरत कैसी दिखाई दे ये औरत की ख़्वाहिश पर मुनहसिर है। अब इसमें दो तीन मसले उमूमी तौर पर आ जाते हैं।

क्या औरत शौहर के कहने पर अपने बाल वगैरह काट सकती है? तो इसमें इस्लाम ने कोई मनाही नहीं रखी बल्कि रुख़्सत दी है, शेख इब्न बाज़ रहीमाहुल्लाह कहते हैं:
औरत के बाल काटने के मुतअल्लिक़ हम कुछ नहीं जानते, बाल मुंडाना मना है, आपको कोई हक़ नहीं कि आप सर के बल मुंडाए, लेकिन हमारे इल्म के मुताबिक़ आप बालों की लंबाई या उसके कसरत से काटने में कोई हरज नहीं।

लेकिन ये अच्छे और अहसन तरीक़े से होना चाहिए जो आप और आपके ख़ाविंद को पसंद हो, वो इस तरह कि आप ख़ाविंद के साथ मुत्तफ़िक़ हों लेकिन बाल कटवाने में काफ़िर औरतों के साथ मुशाबहत नहीं होनी चाहिए, और इसलिए भी कि बाल लंबे होने में उन्हें धोने और कंघी करने में मशक्कत है। चुनांचे अगर बाल ज़्यादा हों और औरत उसकी लंबाई या कसरत में से कुछ काट दे तो कोई नुक़सान नहीं, या इसलिए भी कि बाल काटने में ख़ूबसूरती है जो वो ख़ुद और उसका ख़ाविंद चाहता है और उसे पसंद करता है तो हमारे नज़दीक इसमें कोई हरज नहीं।

लिहाज़ा बाल बिल्कुल काट देना और मुंडा देना जायज़ नहीं, लेकिन अगर कोई उज़्र हो, या बीमारी हो तो ऐसा किया जा सकता है।” (फ़तावा मिरात उल मुस्लिमाह: 2/515)
सहीह मुस्लिम में उम्म सलमा रज़ी अल्लाहुअन्हा से हदीस मर्वी है कि:
नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की अज़्वाज-ए-मुतह्हरात अपने बाल काटा करती थीं हत्ता कि वो कानों के बराबर होते थे।

(सहीह मुस्लिम, क़िताब अल हैज़: 320)

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