शहंशाह बाबर के शासन में कोई मंदिर नही तोडा गया जबकि वहां कोई मंदिर था ही नहीं,महज ही बाबर को बदनाम किया जा रहा है !ड़ा

विशेष संवाददाता

मुगल साल्तन्नत बादशाह बाबर के शासन काल में
बाबर ने कोई मंदिर नहीं तोड़ा। जबकि
वहां कोई मंदिर था ही नहीं।
अयोध्या के सारे मंदिर अकबर के समय में बने।
अकबर बाबर का पोता था।

मंदिर पोते के समय में बने इसलिए दादा द्वारा तोड़े जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता।
राम के बारे में भारत की जनता को तब पता चला जब तुलसीदास ने रामचरितमानस लिखी।
रामचरितमानस अकबर के समय में लिखी गई।
उसके बाद अयोध्या में 400 से ज्यादा मंदिर बने।

जानकार सबको हिस्ट्री का पता हैBकि सातवीं शताब्दी में ह्वेनसांग भारत आया था।
उसने अयोध्या को बौद्ध स्थल बताया है।
उससे पहले राम का जिक्र वाल्मीकि ने किया है।
वह दूसरी शताब्दी में लिखी गई। लेकिन संस्कृत में लिखी हुई थी इसलिए आम जनता को राम के बारे में कुछ खास नहीं पता था।
वाल्मीकि रामायण में बुद्ध का जिक्र है इससे साफ पता चलता है वह बुद्ध के बाद लिखी गई है।

ध्यान देने लायक बात यह है कि रामचरितमानस अवधी लोक भाषा में लिखी गई थीं इसलिए राम के चरित्र को आम जनता ने अपनाया और पूजा करने लगी और मंदिर भी बने।
जबकि बाबर कभी अयोध्या नहीं आया और इतिहास में कहीं किसी मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाने का कहीं कोई जिक्र नहीं है।महज हिंदू मुस्लिम में नफरत की नीव रखी जाती रही है। खास बात ये है कि अयोध्या के कई मंदिर मुसलमान नवाबों और बादशाहों के पैसे से बने हैं वहां की ईंटों पर 786 लिखा है।

आरएसएस तथा भारतीय जनता पार्टी ने बदमाशी पूर्वक पूरे देश में झूठ फैलाया और हिंदुओं को गुंडागर्दी छीन झपट मारपीट और दंगा फसाद में लगाकर उनके रोजगार छीन लिए खेती बर्बाद कर दी मजदूरों के अधिकार छीन लिए पूंजीपतियों को अर्थव्यवस्था सौंप दी।
हिंदू अभी भी बावला होकर भाजपा के पीछे खुद को बर्बाद करने में लगा हुआ है।
इन्हें एक पीढ़ी बाद समझ में आएगा कि इन्हें किस तरह बेवकूफ बनाकर इन्हें बर्बाद किया गया था।

अभी तो यह गाली गलौज और बदमाशी में लगे हुए हैं।
आपको फैसला करना है कि दुनिया में आपको क्या चाहिए जीत या प्रेम ?
यदि आपको दुनिया में जीत चाहिए तो आप दुनिया में नफरत हिंसा और बदसूरती पैदा करेंगे
और अंत में बिस्तर पर पड़े पड़े मर जाएंगे
अन्त में आपकी सारी जीत बेमतलब हो जाएगी।

लेकिन आप यदि प्रेम चाहते हैं तो फिर आप प्रकृति से प्रेम करेंगे सभी मनुष्यों से प्रेम करेंगे। पशु पक्षियों से प्रेम करेंगे और एक खूबसूरत दुनिया बनाने में मदद करेंगे।
स्वार्थी लोग सत्ता पर कब्जा करने के लिए अक्सर आपको जीत के लिए भड़काते हैं।
वह कहते हैं तुम्हारा धर्म अच्छा है। तुम्हारी जाति अच्छी है तुम्हारा रंग अच्छा है तुम्हारा जन्म का स्थान सबसे महान है।

इसलिए जो दूसरे रंग का है दूसरी जाति का है दूसरे धर्म का है दूसरे स्थान का है उससे लड़ो उसे हराओ उसे नीचा दिखाओ। उसे गुलाम बना लो उस पर कब्जा कर लो और हम ऐसा करने में तुम्हारी मदद करेंगे इसलिए हमें सत्ता दे दो।
मर्दों से कहा जाता है औरतें नीची है उन पर काबू रखो।
हिंदू से कहा जाता है मुसलमान तुमसे नीचा है उसे हराओ।
सवर्ण से कहा जाता है दलित तुमसे नीचा है उसे दबा कर रखो।
गोरे काले को दबाते हैं।

एक ही मजहब के लोग अलग-अलग फ़िरकों में बंट कर एक दूसरे को हराने और नीचा दिखाने में लग जाते हैं।
एक ही धर्म के हिंदू जाति में बंटकर एक दूसरे को मारने काटने और नीचा दिखाने में लग जाते हैं।
एक भाषा दूसरी भाषा को नीचा दिखाने में लग जाती है।
एक प्रदेश के लोग दूसरे प्रदेश को अपने से घटिया और खराब मानकर उनकी हंसी उड़ाते हैं उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश में लगे रहते हैं।
इस तरह मूर्खता और नफरत बढ़ती जाती है।
इसका कोई अंत नहीं रहता है।

दूसरे का धर्मस्थल तोड़कर अपना बना लो।
इससे हमारी जीत हो गई दूसरा हार गया
हमने तुम्हें जिता दिया इसलिए हमें वोट दे दो।
हमें सत्ता सौंप दो।
इस तरह की मूर्खता लगातार चलती रहती है।
सारी दुनिया में इसीलिए सेनायें बनी हुई हैं।
मनुष्य ने मनुष्य को मारने के लिए परमाणु बम और बम वर्षक विमान बना रखे हैं।
क्योंकि वह अनेक आधार पर दूसरों को हारना चाहता है संसाधनों पर कब्जा करना चाहता है।
दूसरे से ज्यादा अमीर बनना चाहता है।
ज्यादा ताकतवर बनना चाहता है।
दूसरे को हराना चाहता है।

लेकिन जैसे ही मनुष्य को समझ आएगा कि इस जीत का कोई मतलब नहीं है।
यह मूर्खता है
उसकी सोचने की काम करने की दिशा बदल जाएगी।
यह दुनिया प्रेम के आधार पर टिकी हुई है हिंसा के आधार पर कतई नहीं।
इस दुनिया में गरीबी, बीमारी, भूख बेघरपन युद्ध ,हिंसा, स्वाभाविक नहीं है मनुष्य द्वारा बनाए गए हैं।
जिस दिन मनुष्य जाति को अपनी मूर्खता की भाषा समझ में आएगी
वह यह विनाश का रास्ता छोड़कर प्रेम का रास्ता चुनेगा।
इसलिए जो ठीक दिमाग वाले ठीक सोच वाले लोग हैं उन्हें अपना काम लगातार करते रहना पड़ेगा।

संवाद;
हिमांशु कुमार,

बाबामनईषानंद

SHARE THIS

RELATED ARTICLES

LEAVE COMMENT