इस सैनिक को कब्र में दफन करने के ववक्त अल्लाह के रसुल S A S खुद कब्र में उतरे लाश को दफनाने में मदद की क्या था ये माजरा जाने पूरा खुलासा
संवाददाता
खुर्शीद अहमद
गज़वा ए तबूक से इस्लामी सेना वापस हो रही थी रास्ते में एक जगह आराम करने के लिए पड़ाव डाला गया वहां एक सैनिक की तबीयत बिगड़ी और फिर उनका इंतकाल हो गया मैय्यत को नहला कर व कफ़न पहना कर तैयार किया गया और जब दफ़न करने की बारी आई तो अल्लाह के रसूल सलललाहो अलैहे वसल्लम खुद कब्र में उतरे और लाश को दफनाने में मदद की ।
हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद फरमाते हैं कि नबी करीम सललाहो अलैहे वसल्लम को दफन के काम में मदद करते हुए देख कर मुझे मरने वाले की किस्मत पर रश्क हुआ और मैं सोचने लगा कि काश आज मेरी लाश होती और मुझे अल्लाह के रसूल के हाथों दफ़न होने की साआदत हासिल होती।
आखिर यह सैनिक ( सहाबी ) कौन थे जिनकी किस्मत पर अब्दुल्ला बिन मसऊद जैसे बड़े सहाबी रश्क कर रहे थे ?
इन सहाबी का नाम अब्दुल्लाह मुजनी था। यह मदीना से कुछ दूरी पर कबीला मुजैना में रहते थे। बचपन में यतीम हो गए। चचा ने पाला था बड़े हुए तो चचा की बकरियां चराते और घरेलू काम करते जिससे खाने और पहनने को मिल जाता ज़िंदगी मुश्किल में गुज़र रही थी। कि उन्होंने नबी करीम सललाहो अलैहे वसल्लम के बारे में सुना आप की शिक्षा के बारे में कुछ जानकारी हुई तो शौक हुआ कि चल कर मिलना चाहिए।
घर से निकलने लगे चचा ने रोक लिया। कहा कि तुम कुछ सामान लेकर नहीं जा सकते क्योंकि मेरा दिया हुआ है। आप ने सामान लौटा दिया। चचा कहने लगे कि यह जो कपड़े पहने हुए हो यह भी मेरा दिया हुआ है वापस करो। उन्होंने कहा कि चचा यह रहने दिजिए मैं नंगा हो जाऊंगा। चचा ने परवाह न की और जबरदस्ती कपड़े उतरवा लिए आप नंगें हो कर बैठ गए।ये हाल देख उनकी मां तड़प उठी और दो बोरे काट कर लाईं। आप ने एक बोरे की लुंगी पहन ली और दूसरे बोरे को शरीर के ऊपरी हिस्से में लपेट लिया और घर से निकल पड़े न खाने का सामान न पीने का और ना ही सवारी का परंतु नबी की दीदार का शौक इस कदर था जो उन्हें दरबारे रिसालात में ले आया!
अब्दुल्लाह मुजनी गरीब थे। आम आदमी थे। पर रसूल S AS की मोहब्बत में सरशार थे और रसूल ने भी इस मोहब्बत की लाज रखी। उन्हें अपने से करीब रखा और मरने के बाद अपने मुबारक हाथों से दफ़न किया।
यह हमारे नबी की शान थी। आप अमीर गरीब , गोरे काले , जात बिरादरी और कबीले की परवाह नहीं करते थे। एक आम से सहाबी के लिए कब्र में उतरने से यह पता चलता है कि आप का मामला लोगों के साथ उनके काम के आधार पर था ना कि सोशल स्टेटस के आधार पर और हम उनके उममती गलेमरस पर जान छिड़कते हैं।