खनिज विभाग की घोर लापरवाही के कारण यहां धड़ल्ले से चल रहा है बिना रोक टोक रेत का गोरख धंधा,रेत माफिया कांट रहे है चांदी!
जुन्नारदेव अंबाडा
विशेष संवाददाता एवं जिला ब्यूरो
पिछले काफी समय से समूचे उप क्षेत्र अंम्बाडा़ में रेत का व्यापार चल रहा धड़ल्ले से खनिज विभाग की लापरवाही माफिया काट रहै चांदी
जुन्नारदेव गुढी़ अंम्बाडा़ :-पिछले काफी समय पूर्व से समुचे उप क्षेत्र अंबाडा़ में “रेत” का अवैध व्यापार धड़ल्ले से चल रहा है, इस अवैध व्यापार में खनिज विभाग की पूरी मौन सहमति है, जिससे दिन हो या रात या अवैध व्यापार पूरे समय चलता रहता है।
रेत माफिया एवं खनिज विभाग में पूरी तरह से सांठगांठ हैं, यह बात पूरे दावे के साथ कहीं जा सकती है, वही खनिज विभाग का आशीर्वाद होने से रेत माफिया नंगे नाच रहे हैं, एवं रेत माफिया दोनों की चांदी ही चांदी है, क्षेत्र में इस अवैध व्यापार पर शिकंजा कसना या दबिश देना आज दिनांक तक देखने में नहीं आया।
सनद रहे कि समूचा उप क्षेत्र अंम्बाडा़ कोयला खदान के नाम से जाना जाता है, यहां पर रूपयो की कोई कमी नहीं है, क्योंकि इस क्षेत्र में भूमि -गत से ले कोयले की ओपन कास्ट खदानें संचालित होती हैं, जहां आज भी अधिकारी से लेकर मजदूर सड़कों की संख्या में कार्यरत है, इसके अलावा इस क्षेत्र में अंबाडा़ से लेकर पालाचौरी ,नजरपुर जमकुंडा क्षेत्र में ग्राम पंचायतें हैं, जिसमें दो बड़ी एवं दो छोटी ग्राम पंचायत हैं।
यह क्षेत्र कोयलांचल क्षेत्र से संबंध रखता हैं, इस बात के चलते यहां पर पूरे समय निर्माण कार्य चलते हैं, जिसमें रेत की आवश्यकता महसूस होती रहती है, जिसे रेत माफिया लाकर देते हैं और चांदी काटते हैं।
क्षेत्र कोयलाचंल से संबंध रखता है, इस बात के चलते यहां रूपयो की कोई कमी नहीं है, वे, को, लि, से ले ग्राम पंचायत और स्थानीय जन अपने कोई ना कोई निर्माण करते रहते हैं, जिसमें रेत बेहद जरूरी होती है, जिसे व्यापार को सुचारू ढंग एवं बिना रुकावट के चलाएं सबसे पहले विभाग को मंथली देना तय कर सेट करते फिर अपने व्यापार को संचालित करते है।
मात्र रेत प्रशासन चुप्पी साधे तमाशहीन बना हुआ है घोर लापरवाही की क्या वजह हो सकती है? जिसकी वजह से क्षेत्र में जो बिना खौफ धड़ल्ले से रेत अवैध व्यापार चल रहा है, यहां तुरंत बंद हो। रेत माफिया पर सख्ती से कार्यवाही हो। जिला कलेक्टर से ले कर जिले के एस .पी. से शिकायत होगी, तभी हो सकती है यह कार्यवही। लोग इस बात को समझ चुके हैं।
मनोज डोंगरे- जिला ब्यूरो