सावरकर ने जिस कंपनी में पैसे लगाए थे वह बदमाश निकली,वक्त पर ब्याज की रकम नही दे रही थी यही कारण के वह निराश थे,

विशेष
संवाददाता

माफी के पैसों से, ब्याज का धंधा ..

विनायक दामोदर सावरकर वित्तीय रूप से काफी समझदार थे। आज के 2-2 रुपये प्रति ट्वीट वाले सावरकरवादियों से ज्यादा इन्वेस्टमेंट की समझ रखते थे।
आप सभी सुधिजन पहले से अवगत है कि परम वीर सावरकर माफी के एवज में 60 रुपये हासिल किया करते थे। इसके अलावे चन्दाखोरी से भी अच्छे पैसे आ जाते।

और वो सस्ते का जमाना था। इतना सस्ता कि, सोना तब 18 रुपये 64 पैसे प्रति तोला होता था। बाजार में 1 रुपये लेकर जाओ तो महीने भर का राशन ले आओ।
तो इतने पैसे का आखिर सावरकर करते भी क्या?

मितरों, ब्याज का धंदा सर्वोत्तम होता है। पैसा कभी सड़ता नही, स्टोर करो तो वेट लॉस नही होता, इसके गोदाम नही बनाने पड़ते। पानी, खाद, पसीना नही लगाना पड़ता। बल्कि ब्याज का पैसा दिनोदिन बढ़ता जाता है,कभी घटता ही नही।
बस, कोई दूसरा ये सब करेगा। आप उसके पसीने में इन्वेस्ट कर दो, खून निचोङ कर वसूल कर लो।

ब्याज लेना इस्लाम मे हराम है। और सावरकर, सरकार बनाने जैसे अवसरों को छोड़कर, शेष समय इस्लामिस्टों के विरोधी थे।
ऐसे में ब्याज का धंधा करना, इस्लाम के विरोध करने और चिढ़ाने का एक तगड़ा अहिंसक तरीका है।
इस तरह प्रमाणित होता है कि सलेक्टिव हिंसा के समर्थक, समय समय पर सलेक्टिव अहिंसा का भी पालन करते थे।
बशर्तें उसमे मुनाफा हो।

मितरों, हींग लगे न फिटकरी, रंग चोखा चोखा वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए,
सावरकर ने फ़ॉर डूइंग नथिंग ( माफी मांगकर घर बैठने) के पैसों को फ़ॉर डूइंग नथिंग (ब्याज के धंधे) में लगाया।
मगर हाय री किस्मत…
जिस कम्पनी में इन्वेस्ट की, वो बदमाश निकली। ब्याज के पैसे टाइम पर नही देती थी। इस बात से वीर सावरकर को गहन निराशा हुई।
कच्चे हिन्दुओ ने सच्चे हिन्दू का पैसा मार लिया!

बहरहाल, वीर वही, जो कोई न कोई रास्ता खोज निकाले। तो उन्होंने कम्पनी में पैसा लगाने की जगह, स्वतः ही मित्रों और पहचान वालो को ब्याज पर पैसे देना शुरू कर दिया।
इतनी जानकारी तो savarakar. org पर मिलती है। परन्तु अपुष्ट सूत्रों के अनुसार कहानी अभी बाकी है।

कुछ लोग कहते हैं कि पैसा गुजरात के एक हीरा व्यापारी के धंधे में इन्वेस्ट किया गया। लगाई गई वो राशि, आज बढ़कर आकाश कुसुम हो गयी है। इसी तर्ज पर
सावरकर के चेले पूरे देश पर हावी है सत्ता का आनंद लूट रहे है इनकी पावर के सामने पूरा देश सब कुछ पीड़ाएं चुपचाप सहन कर रहा है , खामोश है इसी की कारण है कि पूरे देश की संपदा सत्ता पक्ष उसी की भरपाई में बेच रहे है।

हे राम । देश की ठगी जनता को कब निजात मिलेगी ऐसे गोरख धंधों के माफियाओं से?

संवाद;पिन्नांकी मोरे

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