ये तो सरासर सनातन और शंकराचार्य को खत्म करने की हो रही संघ द्वारा साजिश

विशेष संवाददाता एवं ब्यूरो

शंकराचार्य और सनातन को खत्म करने की संघ की साजिश

अयोध्या में प्रभु राम का मंदिर राष्ट्रीय एकता और सौहार्द का प्रतीक बन सकता है, लेकिन वह राजनीति की बलि चढ़ता दिखाई दे रहा है। प्रभु राम को ही केंद्र में रखते हुए सनातन को खतरे में डालने की साजिश रची जा रही है। इन दिनों शंकराचार्य और धर्म गुरुओं का अपमान और उनके लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल एक षड्यंत्र के तहत किया जा रहा है। जाहिर है ऐसा करने वाले लोगों का बीजेपी और आरएसएस से सीधे संबंध है।।

दरअसल बीजेपी को यह भ्रम है कि वही हिंदुत्व की रक्षक है और संघ इस गफलत में है कि वह शंकराचार्य से ऊपर है। अधूरे राम मंदिर के उद्घाटन के विरोध में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आवाज क्या उठाई शास्त्र विरोधी लोग तिलमिला उठे हैं। जब भाजपा और संघ को लगता है कि उनकी कुर्सी खतरे में आ रही है तो यह किसी के ऊपर भी हमला करने से नहीं चूकते हैं
इस वक्त हो भी यही रहा है।

उधर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि मंदिर भगवान का शरीर है, मंदिर का शिखर भगवान की आंखों का प्रतिनिधित्व करता है और कलश सिर का प्रतिनिधित्व करता है। मंदिर पर लगा झंडा भगवान का बाल है। बिना सिर या आंखों के प्राण-प्रतिष्ठा करना सही नहीं है। सनातन को मानने वाला हर कोई इससे सहमत है। वहीं राम मंदिर उद्घाटन के कर्ताधर्ता इस सामान्य सी बात को मानने और समझने के लिए कतई तैयार नहीं हैं।

उन्होंने जब अपनी गर्दन फंसती देखी तो शंकराचार्य पर ही हमलावर हो गए. शास्त्र सम्मत प्रमाण देने के बाद भी शंकराचार्य के विरोध में जिस प्रकार की कटु भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है उसके खिलाफ ना तो अभी तक बीजेपी के किसी बड़े नेता का बयान आया है और ना ही संघ ने इस पर कुछ कहा है।

इनकी साजिश को बखूबी समझिए

अब यह बात पूरी तरह से स्थापित हो चुकी है कि भाजपा राम मंदिर को अपने चुनावी एजेंडा के लिए इस्तेमाल कर रही है. बीजेपी के लिए यह बेहद ही मुफीद होगा कि जनता भ्रम में रहे इसलिए मौजूदा समय में राम मंदिर के बहाने सनातन को केंद्र में रखते हुए साजिशें रची जा रही हैं। इसके लिए बीजेपी और संघ ने जनभावना को हथकंडा बनाया है. प्रभु राम मंदिर के उद्घाटन को लेकर देश भर में उमंग और उल्लास होना चाहिए था, लेकिन दुखद यह है कि ऐसा कम से कम जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा है. अधूरे मंदिर के उद्घाटन से असहमत शंकराचार्य ने जब शास्त्रीय विधि-विधान का हवाला दिया तो बीजेपी और आरएसएस समर्थित लोगों ने शंकराचार्य को ही सनातन विरोधी साबित करने के लिए शोर शराबा शुरू कर दिया है. जाहिर है ऐसी स्थिति में सनातन परंपरा को मानने वाले भ्रम की स्थिति में आ गए हैं. इसी भ्रम की स्थिति को भारतीय जनता पार्टी और संघ अपने पक्ष में करने के लिए षड्यंत्र कर रहा है।

शास्त्र विरोधी निर्णय के खतरे

गौर तलब हो कि यह कितना हास्यास्पद है कि बगैर मंदिर का निर्माण पूरा हुए ही “श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट” उद्घाटन के लिए मुहूर्त निकलवा लेती है! हमारी सनातन परंपरा में तो अधूरे घर में भी गृह प्रवेश नहीं किया जाता है, यह तो प्रभु राम का मंदिर है जिसका निर्माण अभी अधूरा है। फिर भी यदि शास्त्र विरोधी लोग ऐसा करने पर तुले हैं तो हो सकता है निकट भविष्य में इसी को पैमाना बनाकर सनातन विरोधी नियमों को स्थापित करने की कोशिश की जाने लगे. यदि ऐसा होता है तो शांति और सौहार्द का प्रतीक सनातन पूरी दुनिया के लिए हास्य का विषय बन सकता है।

आपको सतर्क रहना है

आपको यह बात हमेशा ध्यान में रखनी है कि प्रभु राम आपकी निजी आस्था का विषय हैं। हमारी धार्मिक आस्था की पहचान किसी राजनीतिक दल से जुड़ी नहीं हो सकती. बस इतनी सी बात को ध्यान में रखते हुए इस वक्त हो रहे सारे घटनाक्रमों को बहुत बारीकी से देखने की जरूरत है. कहीं ऐसा तो नहीं एक खास नैरेटिव के तहत आपका इस्तेमाल किया जा रहा है. इस वक्त आप तक पहुंच रही सूचनाओं से ज्यादा आपके द्वारा एकत्र की गई सूचनाएं अधिक विश्वसनीय हैं. मसलन हिंदू खतरे में है और सनातन खतरे में है जैसी बातों में उलझने के बजाय व्यक्तिगत रूप से परखें और खुद निर्णय लें कि वास्तव में खतरा किसके सिर मंडरा रहा है।

संवाद;पिनाकी मोरे

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