यहां एक्सपायरी डेट से फेंकी जा रही है दवाएं, सी एच ओ की मनमानी से ग्रामीण है परेशान

छिंदवाड़ा

से एमडी न्यूज टीम के संवाददाता

गौरव पटेल, मनोज डोंगरे की खास रिपोर्ट

निशानदरयाव सीएचओ की मनमानी से ग्रामीण परेशान
नहीं हो पाई उपयोग अब खुले में फेंकी जा रही एक्सपायरी डेट की दवाएं

छिंदवाड़ा:-ग्राम निशानदरयाव स्थित आरोग्य केंद्र में पदस्थ सीएचओ (कम्यूनिटी हेल्थ ऑफिसर) की मनमानी से ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। समय पर सीएचओ के नहीं मिलने से मरीजों को मजूबर होकर बिछुआ या मोहखेड स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने सीएमएचओ से उचित कार्रवाई की मांग की है।

प्राप्त सूत्रों ने बताया जाता है कि आरोग्य केंद्र निशानदरयाव अंतर्गत आने वाले गांव छाबड़ी,रैपुरा, केकड़ा,जाखावाडी, थावडी,नवलगांव,बोड़ी सहित अन्य गांव व मजरे टोले के ग्रामीण आश्रित हैं। ग्रामीणो ने बताया कि आरोग्य केंद्र एकमात्र एमपीडब्ल्यू,एनएनएम और आशा कार्यकर्ता के भरोसे संचालित हो रहा है। यहां पदस्थ सीएचओ नागेंद्र सूर्यवंशी द्वारा मनमर्जी से आना-जाना किया जाता है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा निरीक्षण नहीं करने से सीएचओ लापरवाही बरत रहे हैं। निशानदरयाव सहित आसपास के गांवों से प्रतिदिन मरीज पहुंचते हैं लेकिन सीएचओ के नहीं मिलने से कई बार बिना इलाज कराए ही लौटना पड़ता है। इसके बाद भी सीएचओ द्वारा लापरवाही बरती जा रही है। ग्रामीणों में आक्रोश है,ग्रामीणों ने सीएचओ की जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है।
सहायक संचालक मेड़म के दौरे के बाद भी गायब रहे सीएचओ

बता दे कि दस्तक अभियान के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग के सहायक संचालक डा.हिमानी यादव का मोहखेड विकासखंड में गुरुवार को दौरा था वह लिंगा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निरिक्षण किए जाने के बाद सीधे बिछुआ निकल गये।.जिम्मेदार जिले के अधिकारी के दौरे के बाद भी सीएचओ नदारद दिखाई दिए।

नहीं हो पाई उपयोग अब खुले में फेंकी जा रही एक्सपायरी डेट की दवाएं

गरीबों को अस्पताल से निशुल्क रूप से दवा वितरण करने के लिए लाखों रुपए की दवाई शासन द्वारा अस्पतालों में भेजी जाती है। लेकिन अस्पताल में बैठे जिम्मेदार चिकित्सक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद भी मरीजों को निशुल्क मिलने वाली दवाएं वितरित न किए जाने कारण कई कीमती दवाएं उपयोग ना हो पाने के कारण एक्सपायर हो जाती हैं। एक्सपायर होने के बाद दवाओं को खुले में फेंक दिया जाता है जिससे, लोगों को गंभीर बीमारी फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है।ऐसा ही कुछ मामला आरोग्य केंद्र निशानदरयाव में देखने को मिला, जहां भारी मात्रा में टेबलेट और सिरप सड़क किनारे खुले में डाल दिए गए इसे आरोग्य प्रबंधन की लापरवाही कहें या अनदेखी। जबकि देखा जाए तो खुले में किसी प्रकार की दवाओं को खुले में फेंकना एक प्रतिबंधित है। क्योंकि खुले में पड़े एक्सपायरी डेट की दवाओं पर कई प्रकार के जीव जंतु और कीट पतंगे बैठते हैं जो आम इंसान को खतरा भी पहुंचा सकते हैं। वहीं आरोग्य आने वाले मरीजों को स्वास्थ्य लाभ मिलने की जगह कई संक्रामक बीमारियों का भी सामना करना पड़ सकता है। जबकि शासन द्वारा निर्धारित किया गया है कि उपचार के दौरान निकलने वाले मेडिकल कचरा और दवाओं को या तो जमीन के अंदर दफनाया जाता है या फिर उन्हें अस्पताल प्रबंधन द्वारा बनाए गए भस्मक में नष्ट किया जाता है। लेकिन आरोग्य केंद्र प्रबंधन की इस लापरवाही के कारण खुले में पड़ा मेडिसन कभी भी कोई बड़ा संक्रमण फैला सकता है जिसके कारण लोगों में आक्रोश उत्पन्न हो रहा है।

सबंधित मामले को लेकर मीडिया टीम ने सबंधित सुपरवाइजर डीएल वानखेड़े से बातचीत की तो उन्होंने तत्काल आकर सबंधित एमपीडब्ल्यू कर्मचारी के साथ उक्त फेकी गयी दवाइयों को नष्ट करवाया गया.वही उन्होंने आरोग्य केंद्र में उपस्थित महिला से सीएचओ के बारे मे पूछा तो उन्होंने कहा कि वह आज नही आयेंगे।

अप्रशिक्षित महिला बांट रही दवाइयां

मिली जानकारी के अनुसार आरोग्य केंद्र में पदस्थ सीएचओ ने गांवकी अप्रशिक्षित महिला को चंद रूपये देकर मासिक महीने से रखा है जो महिला रोज 10 बजे से दो बजे तक केंद्र खोलने के साथ दवाइयां भी वितरित करती है।इस बात की सच्चाई से बीएमओ और सेक्टर सुपरवाइजर भी निरिक्षण से वाकिफ है जिन्होंने फटकार भी लगाई भी थी.किंतु जिम्मेदार सीएचओ के ऊपर क्षेत्रीय सफेदपोश नेताओं का संरक्षण होने से विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कोई भी कार्रवाई नही कर पा रहे है।

इनका कहना

सहायक संचालक का दौरा होने से मै सुबह से उक्त सेक्टर में भ्रमण पर था.इसी दौरान जाखावाडी से वापस लौंटते समय मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान बताया गया निशानदरयाव आरोग्य केंद्र के पास सड़क किनारे खुले में एक्सपायरी दवाओ को फेंका गया है।इस पर मेरे द्वारा नाराजगी जाहिर की और मैने तत्काल आने की बात कही जिसके बाद वहा पहुचकर सबंधित एमपीडब्ल्यूडी कर्मचारी के साथ मिलकर उक्त दवाओ को नष्ट करवाया गया।
डीएल वानखेड़े, सेक्टर सुपरवाइजर मोहखेड

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