फर्जी वकील अलीशा का मामला, प्रशासन का नजरअंदाज अबतक कोई ठोस कार्रवाई नहीं जिम्मेदार कौन?
उत्तर प्रदेश
संवाददाता
नफीस खान की स्नानीखेज रिपोर्ट
योगी जी के शासनकाल में फर्जी वकील आलीशा अंसारी का मामला उन्नाव जनपद में कब तक यूं ही चलता रहेगा
योगी जी के बनाए अपराध मुक्त भारत के सपनों को पुलिस अधीक्षक उन्नाव कब पूरा करेंगे?
विगत कई वर्षों से अलीशा और फिरदौस परवीन दो नामो की महिलाओं का कुख्यात कर रही है इस्तेमाल?
फर्जी अलीशा अंसारी अधिवक्ता और फिरदौस परवीन नामो का इस्तमाल कर उत्तर प्रदेश शासन व उत्तर प्रदेश पुलिस प्रशासन को गुमराह कर खेल रही है चूहा और बिल्ली का यह खेल?
बार काउंसिल से जारी लाइसेंस के पहले दाखिल वाद के वकालतनामे में फर्जी मोहर और फर्जी रजिस्ट्रेशन का करा प्रयोग ?
अधिवक्ता का अलग,अलग नामो से एडवोकेट लिखने का फर्जीवाड़ा उन्नाव जनपद के पुलिस अधीक्षक साहब आखिर कब तक चलता रहेगा?
शातिर महिला पर कार्रवाई से डर किसका सता रहा है ऊपर बैठे अधिकारियों के पास पूरा मामला जा रहा है?
किस संविधान में प्रावधान है कि कोई महिला या व्यक्ति फर्जी अधिवक्ता का मामला न्यूज़ चैनल व न्यूज़ पेपर में उजागर उस मामले का संज्ञान क्यों नहीं?
उन्नाव पुलिस अधीक्षक साहब इतना बड़ा फर्जीवाड़े का मामला रोज उजागर मामले की जांच क्यों नहीं?
पुलिस अधीक्षक साहब देश के बनाए गए कानून में सभी नागरिक एक समान तो महिला पर अभियोग पंजीकृत क्यों नहीं ?
कोई महिला या व्यक्ति दो नामो की ID,दो नामो से बोर्ड व दाखिल वाद के वकालतनामे में दो अलग,अलग नामो की मोहर और रजिस्ट्रेशन फर्जी डालकर प्रयोग हमारे देश के बनाए गए संविधान में व कानून का उल्लंघन है ऐसा कार्य अपराध है क्या महिला पर कानूनी कार्रवाई करना उचित नहीं?
अब तो उन्नाव पुलिस अधीक्षक साहब ही कोई निर्णय ले आखिर इस हाई प्रोफाइल चर्चित फर्जी मामले में आगे करना क्या?
उन्नाव पुलिस अधीक्षक से सवाल;
1,जांच करना क्या उचित नहीं
2, क्या अभियोग पंजीकृत करना उचित नहीं
उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन को इस मामले में जांच करनी चाहिए और दोषी,महिला पर कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। अलीशा अंसारी के खिलाफ पहले से ही कई आरोप हैं, जिनमें चोरी, लूट और झूठा मुकदमा दर्ज कराने के आरोप शामिल हैं। बार काउंसिल ऑफ इंडिया और बार काउंसिल प्रयागराज को भी इस मामले में कार्रवाई करनी चाहिए और महिला के लाइसेंस को निरस्त करने, उसके द्वारा उपयोग किए गए दस्तावेजों की जांच करने, और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने जैसे कदम उठाने चाहिए।
अलीशा अंसारी और फिरदौस परवीन के खिलाफ जांच के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:
– दस्तावेजों की जांच*: अलीशा अंसारी और फिरदौस परवीन द्वारा उपयोग किए गए दस्तावेजों की जांच करनी चाहिए।
-गवाहों की जांच: अलीशा अंसारी और फिरदौस परवीन के खिलाफ गवाहों की जांच करनी चाहिए और उनके बयान दर्ज करने चाहिए।
मोबाइल फोन की सीडीआर
: अलीशा अंसारी और फिरदौस परवीन द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल फोन की सीडीआर की जांच करनी चाहिए और यह पता लगाना चाहिए कि वे किन लोगों के साथ संपर्क में थीं।
गैंग में शामिल लोगों की जांच: अलीशा अंसारी और फिरदौस परवीन के गैंग में शामिल लोगों की जांच करनी चाहिए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।
यह मामला केवल एक महिला के अपराध व फर्जी विधिक व्यवसाय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि कैसे कुछ शातिर लोग कानून की आड़ में अपराध करते हैं। यह समय है जो अलीशा अंसारी और फिरदौस परवीन नामो की महिलाओं की अलग आईडी व कूटरचित दस्तावेजों को आधार मानते हुए दोनों महिला ने भारतीय संविधान का उल्लंघन किया है व बार काउंसिल प्रयागराज उत्तर प्रदेश से छल कपट कर लाइसेंस प्राप्त करने का बड़ा फर्जी वाड़ा किया है,और अधिवक्ता का लाभ लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस प्रशासन की आंखों में धूल झोंका बार काउंसिल को जारी लाइसेंस के समय दिए शपथ पत्र दर्ज थाना जूही से चोरी के मुकदमे को छुपाया उन्नाव पुलिस को यह भी जांच करनी चाहिए कि अलीशा अंसारी और फिरदौस परवीन ने कैसे रजिस्ट्रेशन से 4 माह पहले वकालत नामें में मोहर और रजिस्ट्रेशन,No,1364,/2020 जो बार काउंसिल प्रयागराज से जारी नहीं और डाल कर दर्शाना क्या इसके लिए उन्हें कोई अधिकार था और साथ मनोज कुमार शुक्ल एडवोकेट शपथ आयुक्त प्रभारी की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए जिन्होंने दो अलग-अलग महिलाओं को एक बताकर वाद में मोहर लगाई। उन्नाव पुलिस अधीक्षक को महिला और महिला के परिवार सदस्य जनों और अलीशा अंसारी द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल फोन की सीडीआर और गैंग में शामिल सभी लोगों की गहन,जांच कर आगे की कानूनी कार्रवाई अमल में लानी चाहिए।
ताकि लोगों का न्यायपालिका में विश्वास बना रहे और देश में कानून का राज कायम रहे।