जिस सहाफि को हमारे देश में जीरो टीआरपी एंकर कहते थे ओह तो दुनिया में हीरो बना हुआ है,जाने ओह है कौन?

जिस पत्रकार को भारत में जीरो टीआरपी एंकर कहते थे वह तो विश्व में हीरो बना हुआ है. मोदी के दौर में रवीश कुमार की पत्रकारिता व उनकी जिंदगी पर 100 मिनट की डॉक्युमेंट्री फिल्म While We Watched अमेरिका,कनाडा,इंग्लैंड सहित यूरोप के कई देशों में धूम मचा रही है।

ये भी बता रही है कि कैसे एक पत्रकार तमाम सरकारी दबाव,सत्ता प्रायोजित सांप्रदायिक ताकतों के सिर उठाने, मीडिया के बिकने और जान से मारने की धमकी के बावजूद शांत होकर हल्की धीमी आवाज में एक घंटे का प्राइम टाइम कई साल तक करते रहें। जिसमें उन्होंने सिर्फ और सिर्फ सच दिखाया, सरकार को आईना दिखाया, सरकार को चुनौती दिया …. और इसकी क़ीमत भी उन्होंने चुकाई।

गौर तलब है कि ब्रिटेन के अखबार ” द गार्डियन “ने रवीश की फिल्म पर दो बार स्टोरी की है।. पीटर ब्रैडशा ने लिखा है कि मोदी के दौर में कैसे रवीश दूसरे मीडिया से अलग अकेले आवाज बुलंद करते रहें। तो वहीँ फ़िल्म की समीक्षा करते हुए वेंडी इड लिखती हैं किस तरह बेटी परिवार को जान से मारने की धमकी के बावजूद अविचलित रवीश कुमार सच दिखाते रहें।
फिनांनसियल टाइम्स ने तो टॉम क्रूज के बराबर अपने पेज में रवीश कुमार को जगह दिया और उन्हें असाधारण, साहसी पत्रकार बताया.

इसके अलावा आइरीश टाइम्स,ईस्टर्न आई ने भी रवीश कुमार के फिल्म को महत्वपूर्ण जगह दिया है।. रवीश की यह फिल्म कई पुरस्कार जीत चुकी है और विदेशों में झंडे गाढ़ रही है। सच मानो तो रवीश भारत के पत्रकारिता इतिहास का एक खास महत्वपूर्ण अध्याय है.आपका त्याग, जज्बा और मेहनत कभी जाया नहीं होती रवीश ने यह दिखा दिया।

जो गोदी मीडिया के पत्रकार रवीश का मजाक उड़ाते थे उनके पास जॉब के नाम पर चार चैनल ही है जिसमें वे बारी बारी से जाते रहते है और सरकार के तलवे चाटती रहती है.लेकिन रवीश के पास यू ट्यूब में लाखों सब्सक्राइबर के साथ इज्जत है, सम्मान है जो पूरी दुनिया से उन्हें मिल रही है। न्यूज टीम एमडी द्वारा सलाम है ऐसे जांबाज पत्रकार को। जिस ने कभी किसी के सामने अपनी हार नही मानी।

संवाद;एडमिन

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