कहने को कुछ है ही नहीं इस लिए 400साल पहले और 40 साल के आगे की बातों में उलझाया जायेगा

विशेष
संवाददाता

वो आपको 400 साल पहले और 40 साल आगे की बातों में उलझायेंगे
क्योंकि उनके पास वर्तमान में कुछ कहने को है ही नहीं?

आख़िर किस पर बात करेंगे?

• 2 महीने से ज़्यादा हो गए फिर भी आतंकियों को ना पकड़ने की अपनी नाकामी पर?
अमेरिका के सामने महामानव के सरेंडर पर?
विफल विदेश नीति पर?
भयावह बेरोज़गारी पर?
कमरतोड़ महँगाई पर?
अमीरों और गरीबों के बीच बढ़ती खाई पर?
अडानी महाघोटाले पर?
दिनोंदिन बढ़ते अपराध पर?
अपने विधायकों और नेताओं की गुंडई पर?
आय दिन होते रेल और प्लेन एक्सीडेंट पर? महिलाओं के ख़िलाफ़ जघन्य अपराधों पर?
दरिंदों को संरक्षण देने पर?
मीडिया को गोदी में बिठा कर गले में पट्टा पहनाने पर?
वोटिंग में होती धांधली पर?
लोगों का चुनाव संबंधित जानकारी जानने के अधिकार छीनने पर?
विपक्ष को अपनी पालतू एजेंसी के माध्यम से प्रताड़ित करने पर?
अपने ख़िलाफ़ उठने वाली हर आवाज़ का दमन करने पर?
चंदा दो, धंधा दो की काली करतूतों पर?
संसद से भाग खड़े होने पर?
हर ज़िम्मेदारी से मुँह मोड़ने पर? या अपने भोंडे भद्दे भाषणों पर? या इस देश में लगातार नफ़रत की आग भड़काने पर?

गौर तलब रहे कि
यह कोई बात कर ही नहीं सकते हैं! इसीलिए सिर्फ़ भूत और भविष्य की बातें करेंगे।
आज और अभी से इनका कोई लेना देना नहीं है, जबकि इनकी हकीकत किसी से छुपी नहीं है, 11 साल से झुनझुना बजाने के अलावा और किया ही क्या है? इन्हें गोदी मीडिया का भी तो भरपूर साथ है ऐसे में भला घबराने की जरूरत ही क्या है?

संवाद; पिनाकी मोरे

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