उनके फैजो करम के पहले भी थे चर्चे आज भी बज रहा है डंका, जकेरिया मस्जिद में हुजूर अशरफुल उलमा R A का धूम धाम से मनाया गया 20वा सालाना उर्स मुबारक

मुंबई

आज ही 18सफरूल मुजफ्फर , का वह दिन है बतारिख 9अप्रैल 2004में हुजूर अशरफुल उलमा R A ने दुनिया ए फानी से पर्दा किया था इसी दिन पर उनकी याद में धूम धाम से आज तक मनाया जा रहा है उर्स मुबारक। और बज रहा है उनके नाम का डंका।

गौर तलब है कि मुंबई के भीड़ भाड़ वाले मशहूर इलाका मोहमद अली रोड पर स्थित पर मौजूद आलीशान जकेरिया मस्जिद को कौन नहीं जानता?
जहा बरसों से इमामत और पीर ए तरीकत से वाबस्ता रहे हुजूर अशरफुल उलमा हजरत सैयद हमीद अशरफ अशरफी जिलानी R A का नाम भी बड़े अदब ओ एहतराम के साथ लिया जाता रहा और उन्हें सराहा जाता रहा है।

इस मस्जिद मै हजरत ने बरसों तक इमामत के साथ पीर मुरिदी की और हजारों की तादाद मे छोटे से लेकर बड़े बड़े तालीम याफता मोलनाओ को कुर्रान हाफिज कर उलमा बनाया। और अच्छे बड़े ओहदे पर
तक पहुंचा दिया।
इस इलाके के चारो तरफ इर्द गिर्द में हजारो की तादाद में छोटे से बड़े व्यापारी, चाहत वो मोहब्बत रखने वाले लोग उनके दामन में आकर सिमट गए और बेताबी से मुरीद बन गए है। तरीकत वो मारिफ़त का फैज पाए हुए है। मुंबई से लेकर देश भर में ही नही बल्कि विदेश में इंग्लैंड,अमेरिका,अरबस्तान,पाकिस्तान, वेस्ट बंगाल,कुवैत, मस्कत की धरती पर हजारों ,लाखो की तादाद में हजरत के अशरफी सिलसिले के मुरीद आज मौजूद है। उनका नाम लेवा है।

लगातार दिन की खिदमत में बरसों तक अंजाम देकर 75 साल की उम्र में सन 2004 में दुनिया ए फानी से परदा होने से महज एक हफ्ता पहले जुमा के दिन आप जकेरिया मस्जिद में मिंबर पर खुतबा फरमा रहे थे कि उसी दौरान खचाखच भरे नमाजियों के मजमे में आप ने एलान किया था कि इस बंदे का अगली जुमा के दिन दोपहर एक बजे दुनिया ए फानि से कूच करने का वक्त मुकर्रर हो चुका है। लिहाजा अगली जुमा के बाद आप के बीच यह बंदा नही रहेगा।

वालियों की ज़बान कौन रद कर सकता है?
खुदा का बुलावा था,इस लिए ठीक अगली जुमा यानी 9अप्रैल 2004का दोपहर का वक्त था जैसे कहा था हकीकत सच ही में बदल गया और उसी वक्त उनकी रूह परवाज हो गई। इन्ना लिल्लःही वा इन्ना इलायहे राजीउन।ये मंजर देख मुरीदैन और उनके चाहने वाले अकीदतमंदों का
उस दिन पूरा मजमा रो पड़ा था।

उसके बाद आपका जनाजा लाखों की तादाद मे मोहमद अली रोड से होते मेट्रो सिनेमा की ओर से इस्लामिया जिम खाना ले जाया गया। देर रात भारी तादाद की भीड़ में नमाजे जनाजा अदा की गई।उसके के बाद एरोप्लेन से संताकरूज हवाई अड्डे से यूपी के किछिउछा शरीफ ले जाया गया। और उनके चहनेववालो को दीदार के लिए दो दिन तक रखा गया। उसके बाद इतवार की अल सुबह फज्र नमाज के बाद उन्हें खाक ए सुपुर्द किया गया।

आज इस घटना को बीस साल बीत चुके है लेकिन उनके चहनेववाले मुरीदों की दिल में उनकी याद आज भी पहले जैसी ताजा और बरकरार है।इस लिए उनकी याद में आज ही के दिन जकेरिया मस्जिद में भारी तादाद में उर्स और लंगर आम नियाज़ का प्रोग्राम जोशो खरोश के साथ मनाया जाता है। उसके बाद दिन ब दिन हर तरफ उनके उर्स ए पाक को नियाज़ और तबर्रुकात का सिलसिला दो तीन महीनो तक जारी रहता है। निस्बती अकीदतमंदानो को लंगर ए आम नियाज़ , ओ तंंबरूकात से सरफराज किया जाता रहा है।

हर साल की तरह इस साल भी भारी तादाद में जकेरिय मस्जिद में बिस् वा सालाना उर्स मनाया गया। जिसका वीडियो में नजारा देख सकते है। खुद अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह अकीदत मंद निस्बतियो मुरीदों के दिल खिल उठे है मन में कितनी बेशुमार खुशी दौड़ रही है। वली पीर बाबा अशरफी जिलानी हजरत हामिद पिया की उनके किस हद मंगतों में फैज वो करम बटता जा रहा है कोई शुमार नही। ये सच्ची हकीकत और अकीदत

बया करती हैं।

एडमिन: अब्दुल सलाम अशरफी जिलानी

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