इस बार बुंदेलखंड में चुनावी जंग,इतनी विधान सभा इलाको मे किसकी होगी जीत और किसकी होगी हार जबकि बीजेपी और कांग्रेस पार्टी मे होगा जबरदस्त घमासान, लगी है सबकी निगाहें इस ओर

एमपी
बुंदेलखंड
संवाददाता:पंकज पाराशर छतरपुर

बुंदेलखंड में चुनाव का रण संग्राम, 29 विधानसभा क्षेत्रों में फतह हासिल करने उतरेंगे महारथी, भाजपा एवं कांग्रेस में जबरदस्त टक्कर, बसपा और सपा मौकापरस्तो पर लगाएगी दाव.

मध्य प्रदेश में तीन माह बाद विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में बीजेपी और कांग्रेस ने सभी जिलों में अपनी अपनी ताकत झोंक दी है, वहीं प्रदेश का मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस अपनी कमजोर कड़ियां मजबूत करने
की जुगत में लग गया है।इस बार के विधान सभा चुनाव में प्रदेश के बुंदेलखंड को काफी महत्व दिया जा रहा है।

वैसे तो बुंदेलखंड बीजेपी का गढ़ है। ऐसे में बुंदेलखंड की धरती पर कांग्रेस को अपना परचम लहराने के लिए काफी एडी चोटी का जोर लगाने की जरूरत है। बुंदेलखंड के जिला सागर, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़, निमाड़ी, पन्ना और दतिया है। प्रदेश की 230 सीटों में से सिर्फ 29 सीट तो बुंदेलखंड के क्षेत्र मै शामिल है। जिनमें से ज्यादा तर सीटों पर बीजेपी का कब्जा जमाया हुआ है।

अगर एक नजर 2018 विस चुनाव पर डाले तो 2018 के चुनाव में यहां भाजपा को 15, कांग्रेस को 12 और बसपा व सपा ने एक-एक सीट हासिल की थी। इसमें सागर जिले की रहली सीट भाजपा का गढ़ बन चुकी है। यहां से गोपाल भार्गव लगातार आठ बार से जीत रहे हैं। इसी तरह खुरई को नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेंद्र सिंह ने काफी मजबूत कर लिया है।

सुरखी से गोविंद सिंह राजपूत विधायक हैं। जो 2020 तक कांग्रेस में थे। वहीं दमोह जिले की हटा पर यहां काफी अरसे से बीजेपी का ही राज है। 1998 विधानसभा चुनाव से ही इस सीट पर बीजेपी का कब्जा बना हुआ है और वर्तमान विधायक पीएल तंतुवाय बीजेपी से है। वहीं दमोह जिले की विधान सभा सीट पर कांग्रेस के राहुल सिंह ने भाजपा के कद्दावर नेता जयंत मलैया को 2018 का विधानसभा चुनाव में पटखनी दी थी। सत्ता परिवर्तन के बाद उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और भाजपा के टिकट पर उपचुनाव लड़ा। इसमें कांग्रेस के अजय टंडन ने उन्हें पराजित किया।

बुंदेलखंड में अच्छी नहीं है कांग्रेस की स्थिति

मौजूदा स्थिति की बात करें तो बुंदेलखंड की 4 लोकसभा सीटों में कांग्रेस के पास एक भी सीट नहीं है। चारों सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमा लिया है। ऐसी ही कुछ सीटें विधानसभा स्तर पर हैं। विधानसभा सागर जिले में 8 सीटों में से सिर्फ 2 सीटें कांग्रेस के पास हैं। वहीं दमोह में 4 विधानसभा सीटों में से 1 सीट कांग्रेस के पास है। छतरपुर जिले के हाल अन्य जिलों से कुछ ठीक हैं। जहां की 6 विधानसभा सीट में से 3 सीटें कांग्रेस के पास है।

इसके अलावा टीकमगढ़-निवाड़ी की हालात तो बहुत ही खराब और दयनीय है। जहां एक भी सीट कांग्रेस के पाले में नहीं है। वहीं पन्ना की बात करें, तो पन्ना की 3 सीटों में से सिर्फ एक सीट कांग्रेस के पास है और दतिया जिले में दतिया एवं भांडेर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा की मुहर लगी हुई है।

कौन से विधायकों ने दी कांग्रेस को मात

वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में बुंदेलखंड में कांग्रेस के प्रदर्शन में सुधार हुआ था। सागर जिले की 8 विधानसभा सीट में से 3 सीटें कांग्रेस के कब्जे में आ गई थी, लेकिन सिंधिया खेमे की बगावत के बाद सुरखी सीट पर जब उपचुनाव हुआ और गोविंद सिंह राजपूत भाजपा के टिकट से चुनाव जीते और सीट भाजपा के खाते में चली गई। ऐसा ही छतरपुर में देखने को मिला, जहां 2018 में कांग्रेस ने 6 में से 4 सीटों पर जीत हासिल की थी, लेकिन बड़ामलहरा विधायक प्रद्युम्न सिंह लोधी की बगावत के बाद बड़ामलहरा में उपचुनाव हुए और ये सीट भाजपा के खाते में चली गई।

हालांकि दमोह विधानसभा से भी कांग्रेस विधायक राहुल लोधी ने बगावत की थी, लेकिन वह कांग्रेस की सीट नहीं छीन पाए। ऐसे ही हालात निवाड़ी की पृथ्वीपुर विधानसभा सीट पर बनी। जहां बृजेंद्र सिंह राठौर के निधन के बाद उपचुनाव में उनके सुपुत्र नितेन्द्र सिंह राठौर चुनाव हार गए और सीट गवां बैठे थे। बुंदेलखंड में भाजपा एवं कांग्रेस में जबरदस्त काटे की जंग होने वाली है, बसपा और सपा मौकापरसों पर दाव खेलेगी।

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