IPS संजीव भट्ट को हुई उम्रकैद की सजा, भट्ट के हिरासत में हुई थी मुज़रिम कि मौत !

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रिपोर्ट:- मेहमूद शेख.

बर्खास्त गुजरात-कैडर के आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को 30 साल पुराने हिरासत में मौत के मामले में जामनगर की अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। एक अन्य पुलिस अधिकारी प्रवीण सिंह झाला को भी आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।

उच्चतम न्यायालय ने पिछले सप्ताह भट्ट की याचिका पर 11 अतिरिक्त गवाहों की जांच की मांग पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। संजीव भट्ट इन गवाहों के बयानों को फिर से दर्ज कराना चाहते थे।

घटना के समय संजीव भट्ट जामनगर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के रूप में तैनात थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार, जामनगर में हुए दंगों में भट्ट ने लगभग 100 लोगों को हिरासत में लिया था। इनमें से एक की मौत अस्पताल में उस समय हो गई जब उसे कैद से छोड़ा गया था।

इस आरोप में उन्हें साल 2011 में निलंबित कर दिया गया था। जिसके बाद वह बिना बताए अपनी ड्यूटी से अनुपस्थित रहे थे। इस दौरान उन्होंने सरकारी गाड़ी का दुरुपयोग किया था। अगस्त 2015 में उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था।

दिसंबर 1999 से सितंबर 2002 तक वे राज्य खुफिया ब्यूरो में उपायुक्त के रूप में कार्यरत थे। तब गुजरात के आंतरिक सुरक्षा से जुड़े सभी मामले उनके अधीन थे। इनमें सीमा सुरक्षा और तटीय सुरक्षा के अलावा अति विशिष्ट जनों की सुरक्षा भी शामिल थे। इस दायरे में मुख्यमंत्री की सुरक्षा भी आती थी।

संजीव भट्ट नोडल ऑफिसर भी थे, जो कई केंद्रीय एजेंसियों और सेना के साथ खुफिया जानकारियों का आदान-प्रदान भी करते थे। जब वर्ष 2002 में गुजरात में दंगे हुए थे, उस समय भी संजीव भट्ट इसी पद पर तैनात थे।

जिस मित्र ने अपने घर में पनाह दी थी उसी की पत्नी से अश्लीलता का आरोप भी भट्ट पर लग चुका है,उसमें भी पद के दुरुपयोग को किया गया जाने की चर्चा सुर्खियों में थी।

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