सांप्रदायिक विभाजन की राजनीति किसी भी देश को नष्ट कर देती है जो आज भारत में हो चुका है?

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रिपोर्टर:-

कांग्रेस के नेतृत्व में देश ने क्यों तरक्की की जो आज ध्वस्त हो चुकी है तथा देश स्तरहीन होकर खड़ा है।
आज देश के बहुसंख्यक समुदाय को मानसिक तथा भावनात्मक खुशी देने के काम किये जा रहे हैं तथा भावनात्मकता ज्यादा अच्छी चीज नहीं होती है।

विदित हो कि भगतसिंह ने पं नेहरू तथा सुभाषचंद्र बोस की तुलना करके बोस को भावुक बंगाली कहकर खारिज कर दिया था एवं नेहरू को युगांतरवादी नेता कहा था।
आज हिंदुओं की खुशी का पैमाना कितना छोटा कर दिया गया है कि मात्र मुस्लिम नाम वाले शहरों का नाम बदलकर हिंदू नाम कर दिया जाता है, और बहुत से हिंदू खुश हो जाते हैं।
परिणामस्वरूप अच्छी जगह नौकरी करने वाला हिंदू दिहाड़ी मजदूर तथा मजबूरी में किसान बनकर खड़ा है और कल ही आंकड़े आये हैं कि तीस लाख नये किसान और चौबीस लाख नये दिहाड़ी मजदूर पैदा हो गये हैं।
महजबीं बेगम जो हमारे दिलों में मीनाकुमारी बनकर हुकूमत करती रहीं हैं।

मीनाकुमारी जब कमाल अमरोही बनकर कमाल अमरोही के पैतृक निवास अमरोहा गयीं।
तो कमाल की पहली पत्नी का बेटा कमसिन था तथा उसे कुरान शरीफ तथा उर्दू की शिक्षा देने की व्यवस्था करनी थी।
पूरे अमरोहा में ढूंढ़ा गया तो कोई मौलवी व मौलाना न मिला जो उसे कुरान शरीफ व उर्दू पढ़ा सके।
बड़ी मुश्किल से एक प्रायमरी स्कूल के उर्दू टीचर पं हरिनारायण शास्त्री मिले जो कुरान शरीफ के बहुत अच्छे ज्ञाता तथा उर्दू तो जानते ही थे। उनको मीनाकुमारी के पास लाया गया।
मीनाकुमारी ने जब कमाल के बेटे को कुरान शरीफ और उर्दू पढ़ाने की बात कही तो वो तैयार हो गये।

मीनाकुमारी ने जब पूछा कि आप वजीफा यानी फीस क्या लेंगे तो उन्होंने कुरान शरीफ के नाम पर कहा कि ईश्वर का नाम पढ़ाने का क्या वजीफा लेंगे, जब उर्दू पढ़ायेंगे तब बता देंगे।
आपके हिंदी साहित्य का भक्तिकाल पूरा मुगलों के समय लिखा गया है।
और मुगल चाहते तो सारा कुछ जलवाकर तुलसी, सूरदास, मीरा,जायसी,रहीम व रसखान को जेलों में डलवा देते।
लेकिन उन्होंने तो रामपुर व सीतापुर का नाम तक न बदला।

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