सट्टा बाजार का कितना हाथ होता है , इन ओपिनियन पोल में ? इन पोल की सच्चाई क्या है ? कितना सच्चा – झूठा होता है , यह ओपिनियन पोल ? जानिए सच्ची हकीकत का पर्दाफाश !

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रिपोर्टर.

यह लेख शुरू करने से पहले, यह मैं स्पष्ट कर दूं , मैं शुद्ध पत्रकार हूं मैं किसी राजनीतिक पार्टी से ताल्लुक नहीं रखता ,यह मेरा विचार है ।
हो सकता है मेरा विचार गलत हो ?

आज ओपिनियन पोल से सभी टीवी न्यूज़ चैनल भरे हुए थे ।
सभी के आंकड़े अलग थे, सभी चैनलों पर एक बात स्पष्ट थी पूर्ण बहुमत एनडीए को दिखा रहे थे ।
कोई चैनल 360 सीटें तो कोई चैनल 340 सीटें और कोई चैनल 277 सीटें बता रहे थे ।

आपको एक मजे की बात बतादु कि ओपिनियन पोल कैसे किया जाता है ?

हमारे देश की सबसे बड़ी ओपिनियन पोल करने वाली संस्था, जिस के आंकड़े ज्यादातर सभी टीवी न्यूज़ चैनल आधार मानते हैं ,वह भारत की पूरी सीटों पर लोगों से बात करती है ।

उसने पूरे भारत के आठ लाख लोगों से बात की ,अगर हम सभी लोकसभा की सीटो को 8 लाख लोगों में भाग करें , तो हर सीट पर 15 सो लोगों से चर्चा की, और अपना ओपिनियन पोल का परिणाम जनता के सामने न्यूज़ चैनलों के द्वारा पेश किया !

एक सांसद की सीट पर तकरीबन 20 लाख से 25 लाख वोटर होते हैं और बात की जाती है , 15 सौ लोगों से
, यह 15 सौ कौन होते हैं , किसी को नहीं मालूम किस पार्टी से ताल्लुक रखते हैं किस पार्टी के कार्यकर्ता होते हैं?
बस यह जनता को बेवकूफ बनाना और सट्टा बाजार को फलने फूलने का मौका दिया जाता है!
,3 दिन में पूरे भारत में करोड़ों अरबों रुपए का सट्टा लगेगा, लोग कंगाल होंगे और सट्टा खिलाने वाले मालामाल होंगे  !

सन् 2012 में चुनाव आयोग में एग्जिट पोल पर बैन लगा दिया था , पहले एग्जिट पोल जो होता था ,
मतदान केंद्र से कुछ दूरी पर एक बैलट बॉक्स रख दिया जाता था ,और एक कागज पर सभी पार्टियों के निशान छपे रहते थे आपने जिस को भी वोट दिया है आप उस कागज पर उस पार्टी के निशान के सामने मोहर लगाकर उसे , उस डिब्बे में डाल दिया जाता था ।

चुनाव खत्म होने के बाद उस डिब्बे के कागजों को गिन लिया जाता था , शाम को कितने एग्जिट मत मिले हैं ,उस हिसाब से परिणाम बनाए जाते थे यह पद्धति फिर भी कुछ हद तक सटीक परिणाम बताती थी ।

असली परिणाम 23 मई को आना शुरू हो जाएंगे , और यह स्पष्ट हो जाएगा किस पार्टी की सरकार बन रही है ,और भारत का कौन प्रधान मंत्री होगा , आप लोग इन ओपिनियन पोल पर ज्यादा भरोसा ना करें , जिस पार्टी को ज्यादा ओपिनियन पोल मिले हैं ,उसके समर्थक अभी खुशियां ना मनाएं ,या जिस पार्टी को बहुत कम ओपिनियन पोल मिले हैं , वे निराश ना हो !

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