वाह री पावर कारपोरेशन वाह,अनुभवहीन बड़के बाबू ने किया जनता को त्रस्त करने व भ्रष्टाचार को बढ़ा ने का और फरमान जारी

लखनऊ 3 अगस्त* वैसे तो जब से उत्तर प्रदेश मे राज्य विद्युत परिषद को टुकडो मे बाटा गया है तभी से यह प्रदेश को रौशन करने वाला यह विभाग इन अनुभव हीन बडका बाबूओ की जागीर सा बन गया है। कोई भी बडका बाबू कही से आ कर यहाँ सरमौर बन कर बैठ जाता है और लगता है अपने तुगलकी फर्मानो के चाबुक चलाने ताजा तरीन वाक्या मध्यांचल विद्युत वितरण निगम मे अवैध रूप से तैनात अनुभवहीन बडका बाबू का है।

जिनका फर्मान आज मध्यांचल विद्युत वितरण निगम मे चर्चा का विषय बना हुआ था कि बडकाऊ ने फर्मान जारी किया है कि 3 साल पुराने अनरजिस्टर किराये नामे लगा कर चोरी के या मीटर के बाईपास कर चोरी के सभी मामलो की पुनः जाँच निदेशक वाणिज्य की अगुवाई मे एक टीम गठित कर के कराई जाऐ ।

इससे पहले भी उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन मे अवैध रूप से नियुक्त बडका बाबू जो कि इस वक्त ऊर्जा विभाग भारत सरकार का चला रहे है। उन्होने भी प्रोविजनल बिल संशोधन 2003 के कानून मे राज्य विद्युत नियामक आयोग को किनारे करते हुए अपनी मर्जी से बदलाव कर दिये थे अब मध्यांचल के बडकऊ ने भी आयोग को किनारे कर मनमाना फर्मान जारी किया ।

एक बात समझ मे नही आ रही कि इन बडका बाबूओ को नियम कानून की जानकारीया होती भी है या नही? ऐसे ही विभाग चलाऐगे तीन साल पहले हुई चोरी की जाँच करना आज कैसे सम्भव है? क्या जो नोटरी का किरायनामा है उसको बडकऊ नही मानेगे यानि सभी उपभोक्ता चोर है और तीन साल पुराने मामलो मे अब यह निष्पक्ष जाँच कैसे हो जाएगी,
नोटरी सही है या नही यह कौन और कैसे तय होगा?

न्यायपलिका की जगह विद्युत विभाग के कर्मचारी न्याय करेगे यानि सभी नोट्ररी कमीशनर गलत है और यह सही । जबकि इलेक्ट्रिसिटी एक्ट व सप्लाई कोड मे यह साफ तौर पर लिखा है कि विद्युत चोरी के मामले मे अन्तिम फैसला अधिषाशी अभियन्ता का होगा और उस फैसले या संशोधन के खिलाफ आपत्ति दर्ज करने के लिए मण्डलायुक्त के समक्ष जाना होगा। वहाँ भी पहले उपभोक्ता शमन जमा करे होने के बाद ही सुनवाई होगी ।

फिर यह सविदा पर रखे गये निदेशक इन बडकऊ की बात पर किस कानून के तहत तफ्तीश करेगे जब एक्ट 2003 व संसोधन 2005 पूरे देश मे लागू है और इसमे राजस्व सम्बन्धी सारे अधिकार विद्युत नियामक आयोग को दिए गए है। चाहे बिजली की दरे तय करना हो या शमन बढाना। घटाना तो फिर यह बडका बाबू किस हैसियत से ऐसे आदेश पारित करते है?

जब कि उस राजस्व निर्धारित को कम करने का अधिकार बडकऊ के पास भी नही है इसका पूर्ण कानूनी अधिकार अधिषाशी अभियन्ता के पास है। इसका मतलब यही होता है कि उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन और उसकी सहयोगी कम्पनियो मे अवैध रूप से कब्जा जमाऐ यह बडका बाबू लोग देश की संसद द्वारा पास कानून से भी अपने आप को ऊपर समझते है!

विभाग इनकी जागीर बन गया है जैसे चाहे चलाएगे। उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन मे पूर्व मे तैनात सबसे बडे बडका बाबू जो कि वर्तमान मे सचिव ऊर्जा भारत सरकार है उन्हो ने नियम विरुद्ध अधिषाशी अभियन्ता के अधिकारो की कटौती करते हुए अपने से एक पद उच्च अधिकारी से राजस्व निर्धारित करने के लिए सहमती लेने वा दोगुना शमन वसूलने का गैरकानूनी आदेश पारित किया और अब यह दूसरे आये है।

इन्होने ने तो सभी नियम कानून को खूटी पर टाँग कर अपना तुगलकी फर्मान जारी कर दिया और उसका प्रचार करने का आदेश भी साथ साथ दिया। यानि एक तो गलत आदेश और उपर से उसका प्रचार भी। यानि चोरी उपर से सीना जोरी । इस आदेश का मतलब यानि कि फिर एक और टीम बनेगी वो घर घर जा कर मुआयना करेगी।

फिर अगर उपभोक्ता ने चादी का जूता चला दिया तो ठीक नही तो भरो जुर्माना भरो । तो मध्यांचल के उपभोक्ताओ हो जाओ तैयार चादी के जूते के साथ कि कब कौन चेकिंग के नाम पर वसूली करने पहुच जाऐ और बोले कि नोटरी क्यो कराई रजिस्टर एग्रीमेंट क्यो नही कराया ,11 महीने का एग्रीमेंट क्यो 12 का क्यो नही ? नोटरी क्यो कराया रजिस्टर क्यो नही ? चलो भरो जुर्माना नही तो चाँदी के जूते से मुह सुजवाओ तब छोडेगे नही तो भरो जुर्माना । खैर
युद्ध अभी शेष है।

संवाद
अविजित आनन्द

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