मुट्ठीभर ब्राम्हणों की देन है,जो इतिहास को बदल दिया , ऐसे में कभी दो मज़हब में पड़ी दरार कैसे मिट सकती ?

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रिपोर्टर.
सम्राट अशोक के बाद अगर कोई लोक कल्याणकारी राजा हुआ तो वो शिवाजी महाराज हैं !
ब्राह्मणों ने हमेशा शिवाजी को मुस्लिम विरोधी दर्शाने की कोशिश की है, जब की शिवाजी महाराज कभी किसी धर्म के खिलाफ नही थे !
महाराष्ट्र में 3% ब्राह्मण है, ब्राह्मण राजनेताओं को भली भांति पता है बिना मराठा वोट के वो महाराष्ट्र में राज नही कर सकते !

इसलिए मजबूरन वो शिवाजी को महत्त्व देते हैं, जब की दिल में उनके पेशवा बाजीराव बसता है !
अफ़ज़ल खान वध हो या औरंगज़ेब से दुश्मनी, ब्राह्मण हमेशा अपने तुच्ची राजनीति के लिए यहां शिवाजी महाराज का इस्तेमाल करता है !

दरअसल शिवाजी की सेना में 12 मुस्लिम सेनापति थे और औरंगज़ेब आदिलशाह जैसे बादशाहो से उनकी दुश्मनी राज्य की सीमा सत्ता के दायरे तक सीमित थी इसका धर्म से कोई वास्ता नहीं था !

और जब शिवाजी महाराज निहत्ते अफ़ज़ल खान से मिलने जा रहे थे तब उनका सुरक्षाकर्मी रुस्तमे जमान जो एक मुसलमान था वाघ नख को छुपाकर ले जाने के लिए शिवाजी से आग्रह किया !

शिवाजी और अफ़ज़ल खान जैसे आमने सामने हुए अफ़ज़ल खान उन्हें गले लगाकर उनकी गर्दन दबाने लगा, उस समय शिवाजी को वाघ नख काम आया, और वाघ नख से शिवजी ने अफ़ज़ल खान का पेट फाड़ दिया !

जैसे ही अफ़ज़ल खान घायल हुआ उसका बॉडीगॉर्ड कृष्णा भास्कर कुलकर्णी जो एक ब्राह्मण था शिवाजी पर तलवार लेकर लपका !
लेकिन शिवाजी के बॉडीगॉर्ड रुस्तमे जमान ने कृष्ण भास्कर कुलकर्णी को ऊपर पंहुचा दिया !
वाह रे ग़द्दार ब्राह्मण !

पास्ट प्रेजेंट फ्यूचर हर काल में दुश्मन ब्राह्मण है !
शिवाजी को ब्राह्मणों ने गलत इतिहास रचकर किडनैप किया हुआ है ?
इतिहास को दुरुस्त कर हमें शिवाजी को आज़ाद करा कर बहुजन राजा के रूप में पेश करना चाहिए ना की मराठा !

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