मदरसे तालिमी इदारे खोले गए है सिर्फ लडको के लिए लड़कियों के लिए नही jimmedar?

इस तबाही को क़ौम रोक नहीं सकती क्योंकि हमने अपने तालिमी इदारे क़ौम की लड़कियों के लिए खोले ही नहीं,
जबकि मक़तब, मदरसे खोले तो सिर्फ लड़कों की पढ़ाई के लिए,
मगर क़ौम की बच्चियों को ऐसे ही छोड़ दिया जो ग़ैरों के स्कूलों में उनके तालिमी इदारों में पढ़ने के लिए ,
गोया भेड़ियों की सोहबत में अपनी भेड़ों को छोड़ मुतमईन होकर आराम से बैठे है।
अगर क़ौम की लड़कियां गुमराह होती हैं तो इस गुनाहे अज़ीम के कसूरवार वे माँ बाप होंगे।
जिन्होंने अपनी बच्चियों को हया, ईमान की घुट्टी नहीं पिलाई,
वे पढ़े-लिखे मालदार लोग होंगे जिन्होंने दीगर कारोबार में पैसा लगाया लेकिन तालीमगाह के लिए नहीं !
मकतब मदरसे चलाने वाले वो उलेमा ए इक़राम क़सूरवार होंगे।
जिन्होंने लड़कियों की तालीम के लिए अपने यहां जगह नहीं दी स्कूल नहीं बनवाए।
जल्द ही इसके लिए कदम उठाएं वरनाआनेवाले वक्त में इस तबाही की दस्तक उनके घरों तक भी पहुंचेगी।

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