जाने क्या है, अनुच्छेद 370 के हटने का मतलब ?

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रिपोर्टर:-
जम्मू-कश्मीर राज्य में अब अलग झंडा नहीं होगा, राज्य के विधानसभा का कार्यकाल 6 साल का नहीं होकर पांच सालों का होगा !

राज्य के मुख्यमंत्री के पास कई अहम शक्तियां नहीं होंगी।
दूसरे राज्यों के लोग अब जम्मू-कश्मीर में संपत्ति खरीद सकेंगे।
राज्य का अब अलग संविधान नहीं होगा।
संविधान का यह अनुच्छेद जम्मू-कश्मीर को विशेष अधिकार देता है।
इसके मुताबिक भारतीय संसद जम्मू-कश्मीर के मामले में सिर्फ तीन क्षेत्रों-रक्षा, विदेश मामले और संचार के लिए कानून बना सकती है।

इसके अलावा किसी कानून को लागू करवाने के लिए केंद्र सरकार को राज्य सरकार की मंजूरी चाहिए होती है, जिसकी जरूरत अब नहीं होगी।
इसी अनुच्छेद की वजह से जम्मू-कश्मीर की महिलाओं पर शरीयत कानून लागू होता था।

यदि कोई यदि कोई कश्मीरी महिला पाकिस्तान के किसी व्यक्ति से शादी करती थी, तो उसके पति को भी जम्मू-कश्मीर की नागरिकता मिल जाती थी।
जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता होती थी, जो अब नहीं रहेगा।
अनुच्छेद 370 के चलते कश्मीर में रहने वाले पाकिस्तानियों को भी भारतीय नागरिकता मिल जाती थी।
इसी अनुच्छेद की वजह से जम्मू-कश्मीर में सूचना का अधिकार (आरटीआई) और शिक्षा का अधिकार (आरटीई) लागू नहीं होता था। यहां सीएजी (CAG) भी लागू नहीं था।
इस अनुच्छेद के खात्मे से जम्मू-कश्मीर का देश की मुख्य धारा के एकीकरण हो सकेगा।
जम्मू-कश्मीर राज्य पर संविधान की धारा 356 लागू नहीं होती थी।

राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्खास्त करने का अधिकार नहीं था।
शहरी भूमि कानून (1976) भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता था।
धारा 370 के तहत भारतीय नागरिक को विशेष अधिकार प्राप्त राज्यों के अलावा भारत में कहीं भी भूमि खरीदने का अधिकार था।

कितना बड़ा अजुबा फैसला होता है मोदी सरकार का!
गौर तलब रहे कि पिछले अपने कार्यकाल मे मोदी जी ने रात्रि 08 बजे अचानक टीवी पर प्रकट हुए और बोल पड़े कि आज से 500/- व 1000/- के नोट रद्दी हो जाएँगे,  जबकि वास्तविक रुप से मोदी जी ने संवैधानिक रुप से नोटों को रद्द करने की प्रक्रिया पहले ही गोपनीय रुप से पूरी कर ली थीं, उसी तरह आज ही धारा – 370 को लेकर राज्य सभा में हुआ।

पूरी संवैधानिक प्रक्रिया पहले ही मोदी सरकार ने गोपनीय रुप से पूरी हो गई थी केवल गृहमंत्री अमित शाह जी को राज्य सभा में घोषणा करना था।

घोषणा होते ही जम्मू कश्मीर का अस्तित्व केन्द्र सरकार के मुट्ठी में पूरी तरह से आज दिनांक – 05 अगस्त को कैद हो चुका है।
अब जम्मू कश्मीर दो धड़ों में विभाजित होने के बाद केवल केन्द्र शासित प्रदेश बन करके रह गया है।

अब केवल जम्मू कश्मीर में विधानसभा का चुनाव होगा, लद्दाख में विधानसभा चुनाव की व्यवस्था नहीं रहेगी ।
वहां पर अब भारतीय ध्वज पहरायेगा, अभी तक जम्मू कश्मीर का अपना झंडा था,अब वहां के एमएलए केवल पांच वर्ष के लिए चुने जाएंगे एवं होगें !

जो पहले छ: वर्ष के लिए होते थे, दोहरी नागरिकता व्यवस्था समाप्त,अब कोई भी वहां का नागरिक अन्य राज्यों की तरह स्थायी रूप से बन सकेगा, कुल मिलाकर मोदी सरकार का ऐतिहासिक महत्वपूर्ण फैसला कहा जा सकता है। उक्त जानकारी सूत्रों के साथ।

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