चाचा नेहरू जी के जन्म दिन पर एक नजर

एडमिन

आज चाचा जवाहरलाल नेहरू जी का जन्मदिन है। और खासकर बच्चों को बहुत प्रिय थे चाचा नेहरू।
लोग लाख कोशिशें करें पर इतिहास कौन भुला सकता है? इतिहास को दरकिनार करने की कवायद जो चली है वो हमें किस गर्त में ले जाएगा पता नहीं?
इससे बचना चाहिए। 1947 के बाद वह दिन भी आया जब भारत के नवनिर्माण की आधारशिला रक्खी गई। उस समय हम 38 करोड़ पर थे।
सभी को एकसूत्र में पिरोने का काम नेहरू जी के पवित्र फल का परिणाम था कि हम आज भी उस सूत्र में जड़ित हैं। लेकिन आजादी से पहले जो काम संघी कर रहे थे।
उसके पीछे आज तक पड़े हुए हैं। 1948 में गाँधी का सीना इन्हीं षड्यंत्रों का परिणाम था। उससे भी उन्हें नहीं सहा गया।
अब तो गाँधी जवाहर पटेल भगतसिंह सुभाषचंद्र बोस को ही सिरे से जो नकारने की विस्फोटक साजिश है वह बहुत ही खतरनाक हैं।
आजादी को पाने के लिए एक दिन का अथक प्रयास नहीं बल्कि लम्बा 150 साल संघर्ष चला।
भारत की मिट्टी इतनी सहोदर थी जो भी आया इस मिट्टी में समा गया। मिट्टी सिर्फ मिट्टी नहीं बल्कि सैकड़ों संस्कृतियों का समागम होता है।
टीपू सुल्तान से होते हुए 1857 के मंगलपांडे से होते हुए लखनऊ मेरठ कानपुर गोरखपुर के चौरीचौरा चंपारण पश्चिम बंगाल और गुजरात पाकिस्तान का भूभाग आजादी से पहले का सभी का इस मिट्टी में खून सना है।
जब मिट्टी को खोदेंगे वह आपको लाल दिखेगी महसूसने की जरूरत है। इतनी विशाल संस्कृति के हम द्योतक हैं जिसको नकारा ही नहीं जा सकता है।
राजा राम मोहन राय को कौन भूल सकता है जो औरतों के हक के लिए लगातार संघर्षशील रहे।

राजा राममोहन राय के बारे में

वो ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने East India Company की नौकरी छोड़ खुद को राष्ट्र समाज में झोंक दिया. उन्होंने आजादी से पहले भारतीय समाज को सती प्रथा, बाल विवाह से निजात दिलाया।
हम बात कर रहे हैं ‘राजा राम मोहन’ की जिन्हें दुनिया ‘आधुनिक भारत के जनक’ के नाम से जानती है।
भारत के विचारों में सुधार लाने वाले राजा राम मोहन’ का जन्म 22 मई 1772 को हुआ था।

जानते हैं उनकी जिंदगी के बारे में

1. राजा राममोहन राय का जन्म बंगाल में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था. वे ब्रह्म समाज के संस्थापक थे. साथ ही सामाजिक सुधार युग के पितामह थे।
2. 15 साल की उम्र से उन्हें बंगाली, संस्कृत, अरबी तथा फ़ारसी का ज्ञान हो गया था।
3. अपने करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने ‘ब्रह्ममैनिकल मैग्ज़ीन’, ‘संवाद कौमुदी’ में भी काम किया।
4. उनका सारा जीवन महिलाओं के हक के लिए संघर्ष करते हुए बीता. महिलाओं के प्रति उनके सीने में एक अलग ही जगह थी।
5. राजा राम मोहन राय को महिलाओं के प्रति दर्द उस वक्त एहसास हुआ जब उन्होंने अपने ही घर में अपनी ही भाभी को सती होते देखा।
यह लिखना इसलिए जरूरी था क्योंकि यह भी इतिहास का भाग है। कभी मौका लगे तो जवाहरलाल नेहरू के डिस्कवरी ऑफ इंडिया को जरूर पढ़िए। कम से कम हमारी समझ तो विकसित हो सकती है इतिहास के परिपेक्ष्य में। आज जवाहरलाल नेहरू को याद करना बहुत जरूरी है।
क्योंकि लोग समझते हैं कि इतिहास मर चुका है पर दुःखद, गाँधीजी, जवाहर का इतिहास कभी मरेगा नहीं बल्कि वो लगातार जिंदा होता रहेगा। और हमारे बिगड़ने पर हमारे गाल पर झापड़ भी रसीद करेगा।
जो नहीं सुधरा है अभी भी समय है कि सुधर जाए।
यह जवाहर का ही योगदान था कि लोग सेवानिवृत्त होने के बाद पेंशन पाते थे।
उसे बन्द किया गया पर जिन्हें मिल रहा है वो भी उनको कुछ भी कहने से परहेज नहीं करते।
फर्ज करिये अगर उन्हें पेंशन नहीं मिलता तो लड़के उनको सड़क पर छोड़ दिये होते। इस लिए सोचिये जरूर।
आज फिरसे हमें शांत मन से सोचने की जरूरत है।
जवाहरलाल नेहरू पर एक कविता लिखी थी वो दोबारा आपके लिए प्रेषित कर रहा हूँ।
पंडित जवाहरलाल नेहरू जी के जन्मदिन पर
हम नेहरू जी का वंदन करते हैं साथ में उन्हें उनकी स्मृति को नमन भी करते है।
नेहरू जी आज भी जिंदा हैं।
नेहरू जी के
जन्मदिन
पर ऐसा लगता है
चाचा नेहरू जी आज भी जिंदा हैं।
कहाँ कहाँ उनको लोग
मिटाएंगे,जितना मिटाएंगे
वो उतने ही उभरते चले जायेंगे,वो मिटाएंगे
उनकी वारिसों को भी
नेहरू जी
जिंदा मिलेंगे
कहाँ कहाँ ढूढेंगे?
वो उन कारखानों में
जिंदा हैं,
जिनकी बदौलत हम हैं
वो आज भी जिंदा हैं
जिन्हें आज भी
पेंशन मिलती है।
यह सब
उसी योजनाकार की बदौलत जो उनकी अच्छी
नियत थी।
आज से तुलना मत करिए
क्योंकि आज
हम सभी
नंगे हो चुके हैं।
इसलिए
नेहरू जी
आप बहुत याद आते हैं
अभी भी ।
आपजा ख़ौफ
सभी को है।
आपकी लाइन को
अभी भी कोई
छू नहीं पाया है।
दूसरी लाइन
खींची नहीं गई
बल्कि बर्बरता से
पूरी तल्लीनता से
बर्बाद किया गया
नेहरू ही
आप पहले भी
जिंदा थे
आज भी हैं
और कल भी
रहेंगे
आप कोई चाक से बनी हुई
आकृति नही
कि
कोई भी कपड़े से मिटा दे
आप हम सब पर
एक अमिट छाप हैं।
जो युगों तक
जिंदा रहेगी।
आप हम सब में
अभी भी जिंदा हैं।
आपको अमर
मैं नहीं मानता
क्योंकि
हम सब में
मैं आपको
महसूस करता हूँ।
नेहरू जी
आप जिंदा हैं,
आप जिंदा हैं।

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