क्या सिर्फ मुसलमानों का ही है ईश्वर,,आखिर किस का है अल्लाह और क्या है मतलब?जानिए

अल्लाह का मतलब क्या है

अल्लाह एक अरबिक शब्द है जो अरबी में परमेश्वर के लिए प्रयोग किया जाता है।
हिंदी और अंग्रेज़ी में उसका पर्याय प्रभू, परमेश्वर एवं The God होगा।
अकसर लोगों को यह गलत फहमी होती है कि अल्लाह का मतलब सिर्फ मुसलमानों का खुदा या अरब देश का ईश्वर / होता है।

जब कि ऐसा नही है।
क़ुरआन की शुरू की आयत में ही कहा गया है :-
तारीफ़ अल्लाह ही के लिये है जो तमाम संसारों का रब है।
बड़ा कृपालु, अत्यन्त दयावान हैं । (क़ुरआन 1:1
मतलब अल्लाह ना केवल मुसलमानों का या अरबो का बल्कि समस्त मनुष्य जाति का ही नही, बल्कि सारे ब्रह्मांडो और उसके अलावा जो कुछ भी है (तमाम कायनात) में उसका रचियता है और उसका चलाने वाला है। सभी का परमेश्वर है।

इस विश्व मे जितने भी लोग हैं चाहे वे किसी धर्म के हों। या नास्तिक ही क्यों ना हो अमूमन सभी मानते हैं कि सबके ऊपर एक सबसे बड़ा ईश्वर है। या कोई तो है जिसने इस सारी सृष्टि को बनाया है उसी रचियता और परमेश्वर को अरबी भाषा मे अल्लाह के नाम से पुकारा जाता है।
अकसर अज्ञानता और ना मालूमात की वजह से लोग अल्लाह शब्द और इस के पुकारने वालो से दुर्भावना रख लेते हैं और अंजाने में अल्लाह को कुछ भी अनर्गल बोल कर अपने ही बनाने वाले परमेश्वर का अनादर कर पाप के भोगी होते हैं।

वह परमेश्वर अल्लाह कौन है ? कैसा है ?
इसका बहुत ही सरल और साफ मार्गदर्शन खुद अल्लाह ने क़ुरआन में कर दिया ताकि कोई भी इन सवालों के बारे में अज्ञानता में ना रहे । और उसे अल्लाह के बारे मे बिल्कुल स्पष्ठ और सीधी मालूमात रहे।
क़ुरआन में सुरः इखलास आयात 1-4
कुल हुवल लाहू अहद
अल्लाहुस समद
लम यलिद वलम यूलद
वलम यकूल लहू कुफुवन अहद
मतलब :-

कहो वो अल्लाह (ईश्वर) एक अकेला है।
अल्लाह बरहक़ बेनियाज़ (किसी पर निर्भर नहीं है)।
ना उसने किसी को जना न उसको किसी ने जना।
और उसका कोई हमसर (समकक्ष) नहीं।

समद यानी कि बरहक़ बेनियाज़ का मतलब होता है कि अल्लाह को किसी काम को अंजाम देने में किसी शरीक व मददगार की ज़रुरत नहीं वो आत्मनिर्भर और अपने आप में काफी है। सभी उस पर निर्भर हैं पर वो किसी पर किसी बात के लिए निर्भर नहीं।
ना किसी को जना ना जना गया मतलब ना उसकी कोई औलाद है ना वह किसी की। और ना कोई उसके हमसर है। यानी कि कोई उसके हमकक्ष या बराबर नही। उस जैसा कोई नही है और ना ही किसी से उसकी तुलना की जा सकती है।

क़ुरआन में अल्लाह की सिफ़तों (गुणों) के बारे में और भी कई आयते हैं। लेकिन समस्त विश्व में ईश्वर के बारे में इतनी सही, सटीक परिभाषा और कहीं नही है।

इस पूरे संसार का करता धर्ता, पालनहार एवं रचियता ईश्वर जो उक्त परिभाषा पर सही उतरता है उसे ही एक मालिक के आज्ञाकारी लोग अल्लाह नाम से पुकारते हैं, जो स्वयं उसने अपना नाम कुरआन मे बताया है जिसका अर्थ होता है एक अकेला पूज्य और सच्चे मुस्लिम सिर्फ उसकी ही इबादत करते हैं अगर कोई भी उस सच्चे ईश्वर जो की उक्त परिभाषा के अनुसार है को एक मानता है। फिर चाहे वो उसे किसी और नाम से ही क्यों ना पुकारे, अगर वह सिर्फ एक पालनहार को मानता है तो वह अल्लाह को ही पुकार रहा है।

जैसा कि फरमाया क़ुरआन में

“तुम अल्लाह को पुकारो या रहमान को पुकारो या जिस नाम से भी पुकारो, उसके लिए सब अच्छे ही नाम है।” (क़ुरआन 17:110)

साभार;मो अफजल इलाहाबाद

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