एहसास तो हो गया था पर दैर बहुत हो गई,जमी बेच कर भी ऐ जिंदगी तेरा सहारा न मिल सका कोरोना की लहर में हम डूब गए ,किनारा न मिल सका

भोपाल

संवाददाता

एहसास तो हुआ था मुझे,मगर देर बहुत हो गई,ढूंढे मैंने अपनी ज़िंदगी के निशान वाक़ई बहुत देर हो गई।

ऐसा ही कुछ रीवा के धर्मजय के साथ हुआ,कोरोना नामक असुर ने धर्म को हराकर यह बात साबित कर दी अधर्मी कोरोना की जीत धर्म पर हुई, फिर हार गया धर्म जीत गया कोरोना,ज़मीन बिक गई फिर भी ठीक ना हो सका रीवा का धर्मजय,कोरोना ने धर्मजय को ऐसे गले लगाया और धर्मजय को बहुत दूर ले गया,जहां से कोई वापस लौट के नहीं आ सकता । धर्मजय तो गया साथ में 8 करोड़ की 50 एकड़ ज़मीन भी बिक गई,यह छोटा सा वायरस जो आंखों से नहीं दिखता,बड़ा शक्तिशाली है,8 करोड़ रुपए इलाज में खर्च हुए पर धर्मजय ठीक ना हो सका,
धर्मजय के परिवार ने ठान लिया था,चाहे सब कुछ बिक जाए पर धर्मजय को ठीक कर घर ले जाएंगे,चाहे हर रोज़ 3 लाख रुपए खर्च हो या घर के ज़ेवर बिक जाएं या 50 एकड़ ज़मीन 8 करोड़ रुपए की बिक जाए पर हमारा धर्म बच जाए।

अब धर्मजय के परिवार के मन में यही विचार आता होगा,ज़िंदगी अब ज़िंदगी ना रही मगर क्या कहें धर्म तेरे साथ जितने साल गुज़ारे बेहतर थे।
धर्मजय मध्य प्रदेश के रीवा के किसान थे,धर्मजय आठ महीने पहले कोरोना संक्रमित हुए थे और इलाज में आठ करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए,लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी। रीवा के किसान धर्मजय सिंह को आठ महीने पहले अप्रैल में शहर के संजय गांधी अस्पताल में ऐडमिट कराया गया था,जहां उन्हें फेफड़ो में ज्यादा संक्रमण होने की वजह से चेन्नई के अपोलो अस्पताल में रेफर कर दिया गया। आठ महीने तक चले इलाज में परिवार की 50 एकड़ ज़मीन बिक गई, लेकिन धर्मजय की जान नहीं बच सकी। लंदन के डॉक्टर भी हुए फेल,रीवा के रकरी गांव में रहने वाले धर्मजय के इलाज में देश के कई नामी डॉक्टरों के अलावा लंदन के डॉक्टर भी लगे थे।

लेकिन किसी भी तरह से उनकी जान नहीं बचाई जा सकी और धर्मजय ने दम तोड़ दिया। धर्मजय को एक प्रगतिशील किसान के तौर पर जाना जाता था । मध्य प्रदेश के विंध्य इलाके में गुलाब और स्ट्रॉबेरी की खेती कर उन्होंने अपनी ख़ास पहचान बनाई थी,
26 जनवरी 2021 को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने धर्मजय को उन्नत खेती के लिए सम्मानित भी किया था।
आजकल फिर से कोरोनावायरस ने देश, प्रदेश में पैर जमाना शुरू कर दिया हैं,रोज़ देश में 3 लाख से ऊपर मरीज़ निकल रहे हैं और हमारे शहर भोपाल में तक़रीबन रोज़ पन्द्रह सौ से ज़्यादा मरीजों की पहचान हो रही है,
इतने कोरोना के मरीज़ मिलने के बावजूद लोगों को देखने के बाद ऐसा लगता है,सोशल डिस्टेंसिंग एवं मास्क को ठेंगा दिखा रहे हों और कह रहे हों,हम नहीं सुधरेंगे,शादियों में हज़ार,पांच सौ लोगों का इकट्ठा होना आम बात है,चाय की दुकानों पर चाय की चुस्कियां लेते लोगों के झुंड के झुंड होना आम बात है।
रविवार के दिन किसी भी रेस्टोरेंट में चले जाएं भीड़ होना आम बात है और रेस्टोरेंट के बाहर जगह के लिए वेटिंग में खड़ा होना एक आम बात है ।
थोड़ा एहतियात कर लो,यह लहर भी निकल जाएगी,अगर ऐसा ही रहा,तुम भी धर्मजय की तरह लाखों,करोड़ों रुपए खर्च करते रहोगे और परिवार वाले हाथ मलते रह जाएंगे,ऊपरवाला ना करें,दीवार पर तुम्हारा फोटो लगा होगा और उस पर माला चढ़ी होगी,इसलिए मास्क पहने,सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें,यह वायरस भले ही छोटा हो,आंखों से ना दिखता हो,पर असुर से कम नहीं।

मत थर-थर काँपो तुम,
कोरोना को अब भाँपो तुम ।
यह वक़्त भी गुज़र जाएगा,
थोड़ी तो सावधानी करो तुम।

संवाद
मोहम्मद जावेद खान।

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