अग्निपथ योजना के विरुद्ध हो रहे विरोध प्रदर्शन का आखिर जिम्मेदार कौन?

अग्निपथ योजना के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन का जिम्मेदार मोदी और मीडिया।
मोदी सरकार ने हर साल दो करोड़ नौकरी देने का वादा कर सत्ता में काबिज़ होने के बाद नौकरी के नाम पर धोखा दिया।
नौकरी का अर्थ केवल सरकारी नौकरी से था और इसी अर्थ के साथ लोगों से हर वर्ष दो करोड़ नौकरी का वादा किया था।

मोदी सरकार ने खुद को होशियार और जनता को मूर्ख समझकर उस सरकारी नौकरी के वादे को रोजगार सृजन और आत्मनिर्भर भारत जैसे शब्दावली में लोगों को उलझाया।
मोदी खुद संसद में खड़े होकर आंकड़ा पेश करते हैं कि इस पांच वर्षों में इतने ज्यादा कार की बिक्री हुई अर्थात उतने ही ज्यादा पंचर की दुकानें भी खुली होंगी, उतने ही ज्यादा पार्ट्स के दुकानें खुली होंगी और उतने ही ज्यादा ड्राइवर की जरूरत हुई होंगी।

इन पांच वर्षों में कई अस्पताल खुलें तो अस्पताल के बाहर कई चाय और पकौड़े के दुकानें भी खुली होंगी, क्या ये सब रोजगार नहीं है।
ऐसे कई उलूल जुलूल तर्क संसद में प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा दी गई।
और दूसरी तरफ सरकारी नौकरी देने वाले संस्थाओं को लगातार बेचा गया!

मोदीजी देश के पीएम रहते आठ वर्षों से वेकेंसी का न निकलना, छात्रों का लंबा इंतजार और उस पर ये चार वर्षों का अग्निपथ, फिर क्या था छात्रों का धैर्य टूट गया, ज्वालामुखी फूट गया और पथ अग्नि में बदल गया।
अब मीडिया वाले पूछ रहे हैं कि इस विरोध प्रदर्शन के पीछे कौन?
अरे दल्लों ! तुम ही तो हो। यह दिन न आता अगर तुम सत्ता की दलाली न करते। अगर सत्ता से सवाल करते कि साल के दो करोड़ नौकरियां कहां गया है, सरकारी संस्थाओं को बेच रहे हो तो सरकारी नौकरियां कहां से दोगे और पकौड़े तलने में सरकार की भूमिका क्या है?

मूल मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए मोदी को महान और हिंदू मुसलमान के अर्थहीन डिबेट में लोगों को उलझा कर रखा है। तब तुम्हारी बोलती बंद क्यों हो जाती है?
आज पूछते हो, ट्रेन जलाने वाले ये छात्र क्या सेना के लायक है। पहले तुम बताओ कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के लायक हो?
याद रखना अगर तुम इसी तरह सत्ता की दलाली करते रहोगे तो लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में जनता सड़क पर खड़ी मिलेगी। मीडिया के प्रति लोगों में जो कुछ भरोसा सम्मान और विश्वास है वो सब खत्म होने में कोई देर नही लगेगी।

संवाद
धनंजय कुमार यादव

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